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इन चार वर्षों में कैसी रही विपक्ष की भूमिका, सरकार के साथ एक मूल्‍यांकन इनका भी जरूरी
29-May-2018 05:44 PM 32301     

केंद्र की मोदी सरकार की चार साल की उपलब्धियों और चुनौतियों की मीमांसा के बीच यह भी आवश्यक है कि विपक्ष के भी चार साल की भूमिका का परीक्षण और मूल्यांकन हो लोकतंत्र की संसदीय व्यवस्था में जितना महत्व सत्तारूढ़ दल का होता है उतना ही विपक्ष का भी। लिहाजा दोनों को कसौटी पर कसे जाने का मूल्य-मापदंड एक जैसा ही होना चाहिए न कि अलग-अलग यह सही है कि संविधान ने दोनों समूहों को अलग-अलग जिम्मेदारी सौंपी है और दोनों की भूमिका अलग-अलग है लेकिन दोनों ही अपनी शीर्ष प्राथमिकता में जनहित के सवरेपरि होने की सच्चाई और जनता की कसौटी पर खरा उतरने की जवाबदेही से इन्कार नहीं कर सकते किसी भी सरकार की सफलता और असफलता में उसकी नीतियां और कार्यसंस्कृति जितना महत्व रखती हैं उतना ही विपक्ष का विरोध और सहयोग भी विपक्ष का काम केवल सरकार की हर नीतियों का विरोध करना नहीं, बल्कि जनहित के मसले पर विरोध के केंचुल से बाहर निकल सरकार का सहयोग करना भी है। मौंजू सवाल यह है कि क्या इन चार वर्षो में विपक्ष ने अपनी भूमिका का जिम्मेदारीपूर्ण निर्वहन किया है? क्या वह जनहित के मसले पर सरकार का सहयोग व समर्थन किया है? गौर करें तो इस कसौटी पर विपक्ष का रवैया भी बहुत अधिक सकारात्मक नहीं रहा, बल्कि सच कहें तो उसने हर मौके पर विरोध ही किया है !

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