नई दिल्ली - केंद्र सरकार ने सोने और चांदी के आभूषणों सहित अन्य कीमती धातु उत्पादों के निर्यात पर मिलने वाली ड्यूटी ड्रॉबैक दरों में कटौती की है। वित्त मंत्रालय की ओर से जारी अधिसूचना के मुताबिक, सोने के आभूषणों पर मिलने वाला रिफंड करीब 3.1 प्रतिशत, जबकि चांदी के आभूषणों और संबंधित उत्पादों पर मिलने वाला रिफंड लगभग 9 प्रतिशत घटाया गया है।
इस बदलाव से भारतीय ज्वैलरी निर्यातकों को पहले की तुलना में कम रिफंड मिलेगा। इससे उनकी लागत और मुनाफे के अंतर यानी मार्जिन पर असर पड़ने की आशंका है। खासकर वे कंपनियां प्रभावित हो सकती हैं, जो बड़े पैमाने पर सोने और चांदी के आभूषणों का निर्यात करती हैं।
सोने के आभूषणों पर रिफंड कितना घटा?
अधिसूचना में दिए गए आंकड़ों के अनुसार, सोने के आभूषणों के निर्यात पर ड्यूटी ड्रॉबैक दर 1,851.99 रुपये प्रति ग्राम से घटाकर 1,794.11 रुपये प्रति ग्राम कर दी गई है। यानी निर्यातकों को अब प्रति ग्राम 57.88 रुपये कम रिफंड मिलेगा।
ड्यूटी ड्रॉबैक का उद्देश्य निर्यात के लिए तैयार उत्पादों में इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल और अन्य इनपुट पर चुकाए गए पात्र शुल्कों का बोझ कम करना है। इससे निर्यातकों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्धी कीमतों पर उत्पाद बेचने में मदद मिल सकती है।
दर में कटौती के बाद निर्यातकों को अपनी लागत और मूल्य निर्धारण की रणनीति पर दोबारा विचार करना पड़ सकता है। हालांकि, वास्तविक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि कारोबार की लागत, निर्यात की मात्रा और विदेशी बाजारों में मिलने वाली कीमतों में कितना बदलाव आता है।
चांदी के उत्पादों पर करीब 9 प्रतिशत की कटौती
चांदी के आभूषणों और अन्य संबंधित उत्पादों के निर्यात पर ड्यूटी ड्रॉबैक दर में अपेक्षाकृत अधिक कमी की गई है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, दर 29,501.09 रुपये प्रति किलोग्राम से घटाकर 26,859.02 रुपये प्रति किलोग्राम कर दी गई है।
इस बदलाव से निर्यातकों को प्रति किलोग्राम 2,642.07 रुपये कम रिफंड मिलेगा। ऐसे में चांदी के आभूषणों और अन्य उत्पादों का कारोबार करने वाली कंपनियों की लागत पर असर पड़ सकता है।
जिन निर्यातकों के कारोबार में चांदी से जुड़े उत्पादों की हिस्सेदारी अधिक है, उनके लिए यह बदलाव विशेष रूप से महत्वपूर्ण हो सकता है। हालांकि, कुल प्रभाव का आकलन करने के लिए कंपनियों की लागत संरचना और निर्यात अनुबंधों को भी ध्यान में रखना होगा।
जुलाई में बढ़ाई गई थीं ड्यूटी ड्रॉबैक दरें
इस साल जुलाई में सरकार ने ज्वैलरी निर्यात उद्योग को राहत देने के लिए ड्यूटी ड्रॉबैक दरों में बढ़ोतरी की थी। उस समय सोने के आभूषणों पर मिलने वाला रिफंड 773.17 रुपये प्रति ग्राम से बढ़ाकर 1,851.99 रुपये प्रति ग्राम किया गया था।
इसी तरह, चांदी के उत्पादों के लिए दर 14,990.66 रुपये प्रति किलोग्राम से बढ़ाकर 29,501.09 रुपये प्रति किलोग्राम की गई थी। उस बढ़ोतरी का उद्देश्य निर्यातकों की लागत संबंधी चुनौतियों को कम करना और अंतरराष्ट्रीय बाजार में उनकी प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता को समर्थन देना था। अब दरों में की गई कटौती से जुलाई में बढ़ाए गए रिफंड का कुछ हिस्सा कम हो जाएगा। इससे निर्यात उद्योग में नई दरों के प्रभाव को लेकर चर्चा बढ़ सकती है।
ज्वैलरी कारोबार पर क्या हो सकता है असर?
ड्यूटी ड्रॉबैक में कमी से निर्यातकों को मिलने वाला वित्तीय लाभ घटेगा। यदि कंपनियां अतिरिक्त लागत को खुद वहन करती हैं, तो उनके मार्जिन पर दबाव पड़ सकता है। वहीं, यदि वे लागत का कुछ हिस्सा खरीदारों पर डालती हैं, तो उत्पादों की कीमतों और प्रतिस्पर्धा पर असर पड़ सकता है।
हालांकि, निर्यात पर अंतिम प्रभाव वैश्विक मांग, सोने-चांदी की कीमतों, विनिमय दरों और दूसरे देशों के बाजारों में प्रतिस्पर्धा जैसे कारकों पर भी निर्भर करेगा। मजबूत विदेशी मांग कुछ कंपनियों को राहत दे सकती है, लेकिन कम रिफंड मिलने से अल्पकाल में निर्यातकों के सामने चुनौती बढ़ सकती है।
कुल मिलाकर, ड्यूटी ड्रॉबैक दरों में यह बदलाव भारतीय ज्वैलरी निर्यात क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण है। अब उद्योग की नजर इस बात पर रहेगी कि नई दरें कारोबार की लागत, निर्यात की मात्रा और कंपनियों की लाभप्रदता को किस हद तक प्रभावित करती हैं।