मध्यप्रदेश में बेसहारा गोवंश किसानों और सरकार-दोनों के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है। खेतों में फसल नुकसान से लेकर सड़कों पर हादसों तक, निराश्रित पशु कई समस्याओं का कारण हैं। इन्हीं समस्याओं से निपटने के लिए राज्य सरकार अब गोवंशीय और भैंसवंशीय पशुओं की पहचान के लिए रंगीन टैग लागू करने जा रही है।
केंद्र से मिली टैग योजना की मंजूरी
पशुपालन मंत्री के अनुसार, गोशाला, पालतू और निराश्रित पशुओं के लिए अलग-अलग रंग के टैग लगाने का प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा गया था। इसके बाद केंद्र ने दो रंगों के टैग को मंजूरी दे दी है और जल्द ही ये टैग राज्य को उपलब्ध कराए जाएंगे। टैग लगाने के बाद आम लोग भी रंग देखकर यह पहचान सकेंगे कि पशु पालतू है या निराश्रित।
टैग से तय होगी जिम्मेदारी
मंत्री ने बताया कि पालतू पशु के टैग से मालिक की पहचान संभव होगी। इससे स्पष्ट हो जाएगा कि पशु छोड़ा गया है या नहीं। इस व्यवस्था से पशुओं की पहचान आसान होगी और निराश्रित गोवंश की समस्या पर नियंत्रण में मदद मिलेगी।
प्रदेश में पशुओं की संख्या
प्रदेश में कुल गोवंश और भैंसवंशीय पशुओं की संख्या लगभग 2 करोड़ 90 लाख है
गोवंश: करीब 1 करोड़ 57 लाख
भैंसवंशीय पशु: शेष
मंत्री ने बताया कि प्रदेश में केवल 30% पशु अच्छी नस्ल के हैं, जबकि लगभग 70% देशी अवर्णित नस्ल के हैं। नस्ल सुधार पर जोर देकर दुग्ध उत्पादन बढ़ाने की योजना है।
स्वावलंबी गोशालाओं में नस्ल सुधार को प्राथमिकता दी जाएगी। बड़ी गोशालाएं हर साल अच्छी नस्ल की बछियों का उत्पादन करेंगी, जिससे आने वाले वर्षों में करोड़ों रुपए की आमदनी संभव है।
गोशालाओं की आय बढ़ाने की बहुस्तरीय योजना
सरकार गोशालाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए कई गतिविधियां शुरू कर रही है, जिनमें शामिल हैं
सोलर प्लांट स्थापित करना
ब्रीडिंग और दुग्ध उत्पादन बढ़ाना
सीएनजी और खाद निर्माण
पर्यटन से जोड़ना, जैसे नदी किनारे गोशालाओं में हट्स, बोटिंग और होम-स्टे जैसी सुविधाएं विकसित करना
बड़ी गोशालाओं का विकास
राज्य में स्वावलंबी गोशाला नीति-2025 लागू की गई है। इसके तहत नगरीय क्षेत्रों में 5 हजार से अधिक क्षमता वाली बड़ी गोशालाएं बनाई जा रही हैं। आगर-मालवा, इंदौर, ग्वालियर और उज्जैन में आदर्श गोशालाएं तैयार हैं, जबकि जबलपुर और सागर में निर्माण कार्य जारी है। ग्वालियर की आदर्श गोशाला में देश का पहला 100 टन क्षमता वाला सीएनजी प्लांट भी लगाया जा रहा है।
प्रति गोवंश अनुदान और सहायक सुविधाएं
गोसंवर्धन बोर्ड के माध्यम से गोशालाओं को चारा-भूसा के लिए 505 करोड़ रुपए का बजट दिया गया है।
सहायता राशि: 20 रुपए से बढ़ाकर 40 रुपए प्रतिदिन प्रति गोवंश
घायल और असहाय गायों के लिए हाइड्रोलिक कैटल लिफ्टिंग वाहन भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं।