मुंबई. करणी माता के भक्तों के लिए बड़ी खुशखबरी है। अगले साल 2027 में संत-योद्धा और राजपूतों की कुलदेवी के ऊपर फिल्म कर्णिका रिलीज होने वाली है। इसकी शूटिंग करणी माता के प्रसिद्ध मंदिर देशनोक बीकानेर और जोधपुर में होगी। हनुमान अंश की ब्लॉकबस्टर सफलता के बाद अब देश में भक्ति ड्रामा फिल्मों की लाइन लग गई है। बीते दिनों राधा अंश मचान बाबा राम बोला तेरा साईं और हारे का सहारा बाबा खाटू श्याम हमारा जैसी नई फिल्मों की घोषणा हो चुकी है। अब रविवार 18 अक्टूबर को माता करणी के 639वें जन्मोत्सव पर भूषण कुमार की टी-सीरीज और राज शांडिल्य की कथावाचक फिल्म्स ने अपनी नई फिल्म कर्णिका का ऐलान किया है।
नवरात्रि पर मंगलमय घोषणा
फिल्म कर्णिका की घोषणा शारदीय नवरात्रि के पावन अवसर पर की गई है। नवरात्रि के सातवें दिन करणी माता का जन्मोत्सव मनाया जाता है। मेकर्स ने ऐसे शुभ अवसर पर फिल्म की घोषणा को आस्था श्रद्धा और भक्ति से जुड़ी एक मंगलमय शुरुआत बताया है। यह राजस्थान की सबसे पूजनीय देवियों में से एक करणी माता की आध्यात्मिक विरासत पर आधारित होगी। फिल्म की शूटिंग अगले साल 2027 में शुरू होगी। भक्तों में इस घोषणा को लेकर उत्साह का माहौल है। आस्था आधारित सिनेमा की बढ़ती लोकप्रियता के बीच यह परियोजना महत्त्वपूर्ण मानी जा रही है।
14वीं शताब्दी की संत-योद्धा की गाथा
मेकर्स के मुताबिक कर्णिका के जरिए फिल्म में करणी माता की असाधारण जीवनगाथा और उनकी गौरवशाली विरासत को बड़े पर्दे पर जीवंत किया जाएगा। उनके भक्त उन्हें हिंगलाज माता का अवतार मानते हैं। 14वीं शताब्दी की संत-योद्धा के रूप में स्मरण की जाने वाली माता करणी का जीवन साहस आध्यात्मिक ज्ञान और अटूट आस्था का प्रतीक रहा है। फिल्म उनके जीवन के विभिन्न पहलुओं को दर्शकों के सामने लाएगी। राजपूत और चारण समुदाय की आस्था से जुड़े इस चरित्र को सिनेमाई रूप देने की तैयारी है। ऐतिहासिक और आध्यात्मिक दोनों पक्षों को संतुलित रखने का प्रयास किया जाएगा।
शूटिंग स्थल और रिलीज प्लान
फिल्म की शूटिंग राजस्थान के देशनोक बीकानेर और जोधपुर में की जाएगी। ये स्थान करणी माता की विरासत और उनसे जुड़ी मान्यताओं के लिए विशेष महत्त्व रखते हैं। फिल्म की शूटिंग 2027 की शुरुआत में शुरू होने वाली है और इसे उसी साल रिलीज किया जाएगा। मेकर्स ने फिल्म की कास्ट और डायरेक्टर के नाम को लेकर अभी आखिरी निर्णय नहीं लिया है। फिल्म के निर्माता भूषण कुमार कृष्ण कुमार राज शांडिल्य विमल लाहोटी और निरंजन मुंधड़ा हैं। प्रामाणिक लोकेशन पर शूटिंग से फिल्म को वास्तविकता का स्पर्श मिलेगा।
करणी माता का ऐतिहासिक महत्त्व
मां करणी देवी राजस्थान की एक महान योद्धा संत और चारण समुदाय की पूज्य देवी हैं। उन्हें हिंदू धर्म में मां दुर्गा और हिंगलाज माता का अवतार माना जाता है। उन्हें भगवती करणीजी महाराज भगवती मेहाई जगदम्बा और किनियानी जैसे कई नामों से जाना जाता है। बताया जाता है कि वह 14वीं से 16वीं शताब्दी के बीच पश्चिमी राजस्थान में रहती थीं। करणी माता उत्तर-पश्चिमी भारत के राजपूतों और चारणों की कुलदेवी हैं। सगाती के रूप में उन्हें हिंगलाज या दुर्गा के अवतार के तौर पर भी पूजा जाता है। वह बीकानेर और जोधपुर के राजघरानों की कुलदेवी हैं।
किले की नींव और सैन्य आस्था
बीकानेर और जोधपुर के महाराजाओं के अनुरोध पर करणी माता ने ही बीकानेर किले और मेहरानगढ़ किले की नींव रखी। उन्होंने एक तपस्वी जीवन व्यतीत किया और अपने जीवनकाल में ही वे अत्यंत सम्मानित थीं। मारवाड़ क्षेत्र के भारतीय सेना के जवान भी करणी माता को अपनी संरक्षक देवी मानते हैं। इस इलाके में राजपूतों के वर्चस्व की स्थापना के साथ उनका गहरा संबंध रहा है। उनके आशीर्वाद से ही राव जोधा और राव बीका ने जोधपुर और बीकानेर राज्यों की स्थापना की। ऐतिहासिक घटनाओं में उनकी भूमिका को फिल्म में जगह दी जा सकती है।
देशनोक मंदिर और पवित्र परंपरा
करणी माता के मंदिरों में सबसे प्रसिद्ध देशनोक स्थित करणी माता मंदिर है। इस मंदिर और इसके आसपास की ओरण सभी जीव-जंतुओं के लिए एक सुरक्षित आश्रय स्थल मानी जाती है जहां किसी भी जीव को नुकसान पहुंचाना वर्जित है। राजस्थान में काले हिरणों को पवित्र माना जाता है क्योंकि ऐसा माना जाता है कि करणी माता उनकी रक्षा करती हैं। मंदिर की अनोखी परंपरा और चूहे भक्तों की आस्था का केंद्र हैं। फिल्म में इन सांस्कृतिक पहलुओं को भी दर्शाया जा सकता है। देशनोक की पवित्रता फिल्म की शूटिंग को विशेष बना देगी।