भोपाल डेस्क. स्त्री का सुहाग यानी उसका पति बॉलीवुड के लिए सबसे महत्वपूर्ण किरदार है। मूवीज में पति को खास महत्व मिला है। जब उसी सुहाग के लिए व्रत की बात आती है तो बॉलीवुड ने इसके लिए एक से एक सुंदर गीत रच दिए। इसका उदाहरण है ‘दीपक मेरे सुहाग का जलता रहे, जब तक गंगा मैया में पानी रहे, मेरे सजना तेरी जिंदगानी रहे’। करवा चौथ का व्रत हर साल कार्तिक माह के कृष्णपक्ष में आता है। करवा चौथ के लिए सजना-संवरना ठीक वैसा ही है जैसा कि स्त्री प्रधान फिल्मों में पति के लिए लड़ना या उसके लिए अपनी जान पर खेल जाना। सिनेमा ने इस भावना को गीतों में अमर कर दिया है।
बहू बेटी से शुरू हुई परंपरा
सिनेमा में अब तक जितने गीत बने हैं सभी ने पति-पत्नी के प्रेम को गीतों के माध्यम से पराकाष्ठा पर ले जाकर छोड़ा है। करीब 65 वर्ष पहले बनी मूवी ‘बहू बेटी’ को इस शृंखला की पहली फिल्म माना जाता है। माला सिन्हा और अशोक कुमार, जॉय मुखर्जी तथा मुमताज की इस मूवी में आशा भोंसले ने ‘आज है करवा चौथ सखी री, मांग ले सुख दान’ को जिस तरह से उत्सव जैसा दिखाया वह आगे के लिए नजीर बना। कुछ फिल्मों में तो करवा चौथ ने पति के प्रति पत्नी के प्रेम, समर्पण व त्याग की ऐसी कसक जगाई कि वह गीत ही अमर हो गए। यह परंपरा बाद की फिल्मों में और मजबूत हुई।
सौदागर और सजना के गीत
फिल्म ‘सौदागर’ में नूतन अपने पति के लिए जब ‘सजना है मुझे सजना के लिए, आइना जरा निहार लूं’ गाती हैं तो एक सजी-धजी पत्नी का चेहरा सामने आ जाता है। भले इसे करवा चौथ से सीधा न जोड़ा जाए पर यह हर करवा चौथ पर दोहराए जाने वाले गीतों में शामिल होता है। इसी तरह का गाना है ‘गीत गाता चल’ का गीत ‘मैं वही दर्पण वही, न जाने ये क्या हो गया कि सब कुछ लागे नया-नया’। इसमें सारिका-सचिन की जोड़ी है और लगता है कि करवा चौथ के लिए ही है यह गीत। ये गीत पत्नी के प्रेम और समर्पण को बखूबी व्यक्त करते हैं।
दीपक मेरे सुहाग का और गंगा मैया वाले गीत
आशा भोंसले तथा लता मंगेशकर की आवाज में आया गीत ‘दीपक मेरे सुहाग का जलता रहे, कभी चांद कभी सूरज’ इस दिन के लिए सूरज-चांद की तरह वन एंड ओनली बन गया है। पत्नी का पति के प्रति प्रेम देखिए। उसका मन सूरज-चांद से नहीं भर रहा तो वह पति की जिंदगानी के लिए उससे आगे निकल जाती है। उसे लगता है कि सूरज चांद तो छिप सकते हैं पर मां गंगा कभी नहीं सूखेगी और वह उससे अपने पति का जीवन जोड़ देती है। फिल्म सुहागरात का गीत ‘गंगा मैया में जब तक ये पानी रहे, मेरे सजना तेरी जिंदगानी’ गाने के बाद पति के लिए पत्नी ईश्वर से और क्या मांग सकती है।
करवा चौथ नाम की फिल्म और अन्य गीत
करवा चौथ को पूरी तरह से समर्पित फिल्म ‘करवा चौथ’ 1978 में रामलाल हंस ने बनाई जो इस पर्व के लिए पहली फिल्म मानी जाती है। आशीष कुमार, कामिनी कौशल और हेलन ने इसमें काम किया था। उषा मंगेशकर का गाया गीत ‘करवा चौथ का व्रत ऐसा’ इस मूवी का मुख्य गीत था जिसमें हेलन ने अपनी सखियों के साथ पारंपरिक तौर-तरीके से करवा चौथ को सेलिब्रेट किया। मांग भरो सजना फिल्म में रेखा तथा मौसमी चटर्जी ने जीतेन्द्र के लिए व्रत रखकर समर्पण के साथ गीत प्रस्तुत किया। ये फिल्में पर्व की ऐतिहासिकता को नया मोड़ देती हैं।
आधुनिक फिल्मों में भी जीवित है भावना
दूसरी फिल्मों में भी कई गीत ऐसे रहे जिन्होंने दर्शकों को करवा चौथ के प्रति संवेदनशील बनाया। इनमें दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे का ‘घर आ जा परदेसी’, कभी खुशी कभी गम का ‘बोले चूड़ियां’, हम दिल दे चुके सनम का ‘चांद छुपा बादल में’ और जख्म का ‘गली में आज चांद निकला’ शामिल हैं। सैकड़ों ऐसे गीत हैं जो भले ही करवा चौथ का आधार नहीं लेते हों पर इस दिन बहन-बेटियां और सास-बहू गुनगुनाती नजर आती हैं। बॉलीवुड ने करवा चौथ को सिर्फ व्रत नहीं बल्कि प्रेम, समर्पण और त्याग का प्रतीक बना दिया है जो आज भी घर-घर में जीवित है।