तेलअबीब. गादी आइजेनकोट इजरायल के पूर्व सैन्य प्रमुख हैं। उन्होंने इजरायल की सेना में 41 साल तक सेवाएं दीं और 2015 से 2019 तक इजरायल डिफेंस फोर्सेज यानी IDF के चीफ ऑफ स्टाफ रहे। समाचार एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक आइजेनकोट अब प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के सामने एक मजबूत राजनीतिक विकल्प के रूप में उभरे हैं। उनका राजनीतिक अभियान सुरक्षा सैन्य अनुभव और नेतन्याहू के नेतृत्व में बदलाव की मांग पर केंद्रित है। उनकी सादगी और सीधे बोलने की शैली उन्हें अन्य नेताओं से अलग बनाती है।
सैन्य करियर और पहचान
आइजेनकोट की पहचान मुख्य रूप से एक सैन्य अधिकारी की रही है। वे लंबे समय से इजरायल की राजनीति के केंद्र में नहीं रहे। सैन्य पृष्ठभूमि उन्हें सुरक्षा मुद्दों पर विश्वसनीयता प्रदान करती है। फिलिस्तीन हमास और ईरान जैसे मुद्दों पर उनके विचार सख्त हैं। उन्हें नेतन्याहू की नीतियों का उदारवादी विकल्प समझना गलत होगा। उनकी सैन्य उपलब्धियों और अनुशासन ने जनता में विश्वास पैदा किया है। पूर्व सेना प्रमुख के रूप में उनका अनुभव चुनावी अभियान का बड़ा आधार है।
नेतन्याहू को चुनौती का आधार
इजरायल में 27 अक्टूबर 2026 को होने वाला आम चुनाव बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यह 7 अक्टूबर 2023 को हमास के हमले के बाद देश का पहला आम चुनाव है। उस हमले में लगभग 1200 लोग मारे गए थे और 251 लोगों को बंधक बना लिया गया था। इसके बाद इजरायल ने गाजा में व्यापक सैन्य अभियान चलाया। इस युद्ध ने इजरायल की सुरक्षा व्यवस्था सरकार की जवाबदेही और नेतन्याहू के नेतृत्व पर गंभीर सवाल खड़े किए। आइजेनकोट इन्हीं सवालों को उठाकर चुनावी मैदान में उतरे हैं।
7 अक्टूबर हमले और असंतोष
7 अक्टूबर 2023 के हमले ने इजरायल की सुरक्षा व्यवस्था की कमजोरियों को उजागर किया। नेतन्याहू सरकार से पूछा जाता रहा है कि खुफिया एजेंसियां और सेना इतने बड़े हमले को रोकने में नाकाम क्यों रहीं। गाजा में लंबे सैन्य अभियान ने भी दबाव बढ़ाया। बंधकों की रिहाई हमास की क्षमता समाप्त करने और गाजा के भविष्य जैसे लक्ष्य विवादित रहे। आइजेनकोट का कहना है कि नेतन्याहू सरकार हमास की शक्ति खत्म करने का लक्ष्य हासिल नहीं कर सकी। युद्ध के उद्देश्यों और रणनीति में अंतर रहा। यही मुद्दा वे प्रचार में उठा रहे हैं।
याशार पार्टी और जनमत सर्वे
जनमत सर्वेक्षणों में उनकी पार्टी याशार नेतन्याहू की लिकुड पार्टी को कड़ी टक्कर दे रही है। कुछ सर्वेक्षणों में याशार आगे भी दिखाई दी है। नेतन्याहू के सामने चुनौती केवल विपक्षी दलों से नहीं है। उन्हें 7 अक्टूबर की सुरक्षा नाकामी गाजा युद्ध के नतीजों और दक्षिणपंथी सहयोगियों को लेकर भी सवालों का सामना करना पड़ रहा है। आइजेनकोट खुद को ऐसे नेता के रूप में पेश कर रहे हैं जो सुरक्षा से समझौता किए बिना सरकार के कामकाज में बदलाव ला सकते हैं। हालांकि सर्वेक्षण चुनाव के नतीजे नहीं होते।
इजरायल राजनीति में संभावित बदलाव
नेतन्याहू इजरायल के सबसे लंबे समय तक प्रधानमंत्री रहने वाले नेताओं में शामिल हैं। उनके समर्थक उन्हें सुरक्षा में अनुभवी मानते हैं लेकिन विरोधी उनके नेतृत्व में आए संकटों का आरोप लगाते हैं। नेतन्याहू भ्रष्टाचार के मामलों में मुकदमे का भी सामना कर रहे हैं। आइजेनकोट का उदय इजरायल की राजनीति में नए समीकरण बना सकता है। जटिल गठबंधन व्यवस्था को देखते हुए अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि वे प्रधानमंत्री बन जाएंगे। लेकिन उनका बढ़ता दबदबा नेतन्याहू के लिए चुनौती जरूर बन गया है।