नई दिल्ली. अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच बिगड़ते रिश्तों के बीच दिल्ली और मॉस्को इस क्षेत्र में चरमपंथ और सीमा पार से होने वाले आतंकी खतरों से निपटने के लिए अपनी रणनीतियों में तालमेल बिठाने की कोशिश कर रहे हैं। साथ ही वे तालिबान को अपनी स्थिति मजबूत करने में मदद देने पर भी विचार कर रहे हैं। रूस के विदेशी खुफिया प्रमुख सर्गेई नारिश्किन ने इस हफ्ते काबुल का दौरा किया और अफगान खुफिया प्रमुख मौलवी अब्दुल हक वासिक के साथ बैठक की। हालांकि दोनों पक्षों ने बैठक के बारे में कोई जानकारी नहीं दी है लेकिन माना जा रहा है कि इन दोनों वरिष्ठ अधिकारियों ने सीमा पार से होने वाले आतंकी खतरों यूरेशिया पर इसके संभावित असर और अफगानिस्तान-पाकिस्तान के बीच बिगड़ते रिश्तों को लेकर अपनी-अपनी रणनीतियों में तालमेल बिठाने पर चर्चा की।
रूस की तालिबान नीति
रूस पहला ऐसा देश है जिसने तालिबान सरकार को आधिकारिक तौर पर पूरी राजनयिक मान्यता दी है उनके साथ औपचारिक द्विपक्षीय संबंध स्थापित किए हैं और एक रक्षा समझौता भी किया है। यह कदम क्षेत्रीय सुरक्षा व्यवस्था में रूस की सक्रिय भूमिका को दर्शाता है। तालिबान के साथ संबंध मजबूत करके रूस अफगानिस्तान में स्थिरता लाने और आतंकी गतिविधियों पर अंकुश लगाने की कोशिश कर रहा है। भारत भी इस क्षेत्र में सुरक्षा चुनौतियों को लेकर सतर्क है और रूस के साथ समन्वय बढ़ा रहा है। दोनों देशों के बीच खुफिया आदान-प्रदान से क्षेत्रीय खतरों का बेहतर आकलन संभव हो सकेगा।
भारत-रूस स्तर पर चर्चा
इस बीच रूस के उप-राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार ने अपने भारतीय समकक्ष से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने अफगानिस्तान-पाकिस्तान की स्थिति और पाकिस्तान की ओर से होने वाले सीमा पार आतंकवाद पर चर्चा की। दोनों पक्षों ने क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों को लेकर अपने दृष्टिकोण साझा किए। भारत वर्षों से पाकिस्तान पर सीमा पार आतंकवाद जम्मू-कश्मीर में आतंकवादियों की घुसपैठ और देश भर में बम विस्फोटों व हत्याओं को अंजाम देने में मदद करने का आरोप लगाता रहा है। भारत ने कई बार पाकिस्तान के सरकारी तत्वों की सक्रिय संलिप्तता के ठोस सबूत पेश किए हैं।
पहलगाम हमले और जवाबी कार्रवाई
पिछले साल अप्रैल में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले के जवाब में भारत ने पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर यानी पीओके में आतंकी ढांचे को निशाना बनाते हुए हवाई हमले किए थे। यह कार्रवाई भारत की नीति को स्पष्ट करती है कि सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ कठोर कदम उठाए जाएंगे। रूस के साथ खुफिया सहयोग से भारत को क्षेत्रीय आतंकी नेटवर्क की बेहतर जानकारी मिलने की उम्मीद है। दोनों देश मिलकर आतंकवाद के वित्तपोषण और प्रशिक्षण केंद्रों पर नजर रखने की रणनीति बना रहे हैं। यह सहयोग क्षेत्रीय स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।
आगे की रणनीति और क्षेत्रीय प्रभाव
भारत और रूस के बीच बढ़ता खुफिया सहयोग अफगानिस्तान-पाकिस्तान तनाव के बीच सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में कदम है। तालिबान के साथ रूस के संबंध और भारत की सुरक्षा चिंताओं को ध्यान में रखते हुए दोनों देश समन्वित दृष्टिकोण अपना रहे हैं। सीमा पार आतंकवाद पर लगाम लगाने के लिए खुफिया जानकारी का आदान-प्रदान और संयुक्त रणनीति तैयार की जा रही है। यूरेशिया क्षेत्र पर आतंकी खतरों के संभावित असर को लेकर भी चर्चा हो रही है। यह साझेदारी आने वाले समय में क्षेत्रीय सुरक्षा वास्तुकला को नई दिशा दे सकती है और आतंकवाद के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने में मददगार साबित होगी।