नई दिल्ली - नियाभर में संक्रामक बीमारियों पर नजर रखने वाली स्वास्थ्य एजेंसियों के सामने शमोंडा वायरस को लेकर एक नया मामला आया है। फ्रांस में पहली बार एक इंसान में इस वायरस के संक्रमण की पुष्टि हुई है। संक्रमित व्यक्ति की उम्र 60 वर्ष से अधिक थी और उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता गंभीर रूप से कमजोर थी। इलाज के दौरान अक्टूबर की शुरुआत में उनकी मौत हो गई। हालांकि, स्वास्थ्य अधिकारी अभी जांच कर रहे हैं कि वायरस की संक्रमण और मरीज की मौत के बीच क्या संबंध था। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और यूरोपीय स्वास्थ्य एजेंसियां इस मामले पर नजर रख रही हैं।
क्या है शमोंडा वायरस?
शमोंडा वायरस एक प्रकार का ऑर्थोबुन्यावायरस है, जो अब तक मुख्य रूप से पशुओं में संक्रमण के लिए जाना जाता था। इसकी पहचान पहली बार 1960 के दशक में नाइजीरिया में मवेशियों में हुई थी। इसके बाद अफ्रीका और एशिया के कुछ हिस्सों में भी पशुओं में इसके संक्रमण की जानकारी सामने आई। यह वायरस श्मालेनबर्ग वायरस से संबंधित है। मुख्य रूप से मवेशी, भेड़ और बकरियां इससे प्रभावित हो सकते हैं। घोड़ों और अल्पाका जैसे अन्य पशुओं में भी इसकी मौजूदगी दर्ज की गई है।
पशुओं में क्या दिखाई देते हैं इसके लक्षण?
शमोंडा वायरस से संक्रमित पशुओं में कई तरह के लक्षण देखने को मिल सकते हैं। इनमें बुखार, दस्त, भूख कम लगना और दूध उत्पादन में गिरावट शामिल हैं। गर्भवती पशुओं में संक्रमण के कारण गर्भपात, मृत बच्चे का जन्म और जन्मजात विकृतियों जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं। हालांकि, संक्रमण के लक्षण हर पशु में एक जैसे हों, यह जरूरी नहीं है। इन प्रभावों के कारण पशुपालकों को पशुओं के स्वास्थ्य और दूध उत्पादन में होने वाले असामान्य बदलावों पर ध्यान देने की जरूरत होती है।
इंसानों में संक्रमण के लक्षण क्या हैं?
इंसानों में शमोंडा वायरस का यह पहला दर्ज किया गया मामला है। इसलिए मनुष्यों में इसके संभावित लक्षणों और बीमारी के स्वरूप के बारे में अभी पर्याप्त जानकारी उपलब्ध नहीं है। फ्रांस में संक्रमित व्यक्ति पहले से गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे और उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता काफी कमजोर थी। स्वास्थ्य अधिकारियों ने मरीज में गंभीर न्यूरोलॉजिकल यानी तंत्रिका तंत्र से जुड़े लक्षणों की भी जानकारी दी है। शुरुआती आकलन में इन जटिलताओं को वायरस से संबंधित माना गया है, लेकिन इसके प्रभावों को समझने के लिए जांच जारी है। एक मामले के आधार पर यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि वायरस सभी संक्रमित लोगों में ऐसे ही लक्षण पैदा करेगा।
कैसे फैल सकता है यह वायरस?
शमोंडा वायरस पशुओं के बीच मुख्य रूप से Culicoides प्रजाति के छोटे, काटने वाले मिज कीड़ों के जरिए फैलता है। फ्रांस में सामने आए मामले में भी संक्रमित कीड़े के काटने से संक्रमण होने की आशंका जताई गई है। हालांकि, संक्रमण का सटीक स्रोत और तरीका पता लगाने के लिए जांच चल रही है। अब तक इंसान से इंसान में इसके फैलने का कोई प्रमाण नहीं मिला है। फ्रांस की स्वास्थ्य एजेंसियों के मुताबिक, फिलहाल आम आबादी के लिए किसी विशेष स्वास्थ्य जोखिम की पहचान नहीं हुई है।
क्या घबराने की जरूरत है?
स्वास्थ्य एजेंसियां इस असामान्य मामले की निगरानी कर रही हैं। वैज्ञानिक यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि वायरस इंसान तक कैसे पहुंचा और इससे मानव स्वास्थ्य पर क्या असर पड़ सकता है।
फिलहाल उपलब्ध जानकारी के अनुसार, आम लोगों के लिए किसी विशेष खतरे की पहचान नहीं हुई है। फिर भी, क्योंकि इंसानों में संक्रमण का केवल एक मामला सामने आया है, इसलिए वायरस के व्यवहार और संभावित प्रभावों को लेकर अभी कई सवालों के जवाब मिलना बाकी है।