वॉशिंगटन - अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर भारी टैरिफ लगाने से जुड़े नए कानून के कुछ प्रावधानों पर रोक लगाकर भारत और चीन को राहत दी है। यह फैसला ऐसे समय आया है, जब रूस से ऊर्जा खरीदने वाले बड़े देशों पर 100 प्रतिशत तक अतिरिक्त शुल्क लगाए जाने की आशंका थी। अमेरिकी मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, ट्रंप ने राष्ट्रीय हित का हवाला देते हुए प्रतिबंधों और टैरिफ से जुड़े प्रावधानों को फिलहाल लागू नहीं करने का निर्णय लिया है।
रूस से तेल खरीदने पर लग सकता था 100% टैरिफ
सितंबर 2026 में ट्रंप ने Lindsey O. Graham Sanctioning Russia and Iran Act पर हस्ताक्षर किए थे। इस कानून के तहत अमेरिकी राष्ट्रपति को रूस से तेल और गैस खरीदने वाले प्रमुख देशों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का अधिकार दिया गया था। भारत और चीन भी रूस से ऊर्जा खरीदने वाले बड़े देशों में शामिल हैं, इसलिए इस प्रावधान का असर दोनों देशों के व्यापार पर पड़ सकता था।
हालांकि, कानून के तहत टैरिफ अपने-आप लागू नहीं होने थे। इन्हें लागू करने का फैसला अमेरिकी राष्ट्रपति के अधिकार क्षेत्र में था। अब ट्रंप के ताजा कदम से इन शुल्कों के तत्काल लागू होने का खतरा टल गया है।
राष्ट्रीय हित का हवाला देकर रोका फैसला
रिपोर्टों के मुताबिक, ट्रंप ने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में प्रतिबंधों को रोकना अमेरिका के राष्ट्रीय हित में है। ऊर्जा की कीमतों और आपूर्ति से जुड़ी चिंताओं के बीच यह फैसला लिया गया है। इस कदम से रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर प्रस्तावित अतिरिक्त शुल्कों को लेकर बनी अनिश्चितता फिलहाल कम हुई है।
लिंडसे ग्राहम थे कानून के प्रमुख समर्थक
इस कानून को दिवंगत रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम का समर्थन प्राप्त था। इसका उद्देश्य रूस की ऊर्जा और रक्षा से होने वाली आय पर दबाव डालना तथा यूक्रेन युद्ध के लिए रूस को मिलने वाले आर्थिक संसाधनों को सीमित करना था। कानून में रूस से जुड़े प्रतिबंधों को बढ़ाने और उसके ऊर्जा कारोबार से जुड़े देशों पर कार्रवाई के प्रावधान शामिल थे।
भारत को क्या मिल सकती है राहत?
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़ी मात्रा में कच्चे तेल का आयात करता है। रूस से होने वाली खरीद पर अतिरिक्त अमेरिकी टैरिफ लगने की स्थिति में भारतीय निर्यातकों और अमेरिका के साथ व्यापारिक संबंधों पर दबाव बढ़ सकता था। फिलहाल टैरिफ प्रावधानों को रोकने के फैसले से भारत को तत्काल राहत मिली है, हालांकि आगे की स्थिति अमेरिकी प्रशासन के अगले फैसलों पर निर्भर करेगी।
यह फैसला टैरिफ और प्रतिबंधों के लागू होने से जुड़ी मौजूदा स्थिति को बदलता है, लेकिन इसे रूस पर लगाए गए सभी अमेरिकी प्रतिबंधों की समाप्ति नहीं माना जाना चाहिए।