चांदिपुरा वायरस से गुजरात में कई बच्चों की मौत हो गई है....जिसके बाद वहां तहलका मंच गया की आखिरकार ये वायरस है क्या...और सिर्फ गुजरात में ही नहीं महराष्ट्र राजस्थान पुणे से भी इसके मरीज सामने आ रहे हैं...तो सबसे पहले जानतें है कि ये वायरस है क्या और कब आया, क्या है इसके लक्षण ,कैसे सावधानी बरते।
चांदिपुरा वायरस सबसे पहले महराष्ट्र के चांदी पुर गांव से 1965 में आया..जिसके बाद से ही इसका नाम चांदिपुरा वायरस पड़ गया...मक्खी, मच्छरों, अन्य कीट पतंगों के काटने से ये बिमारी फैलता है....इस स्थिति में बुखार, फ्लू जैसे सामान्य लक्षणों के साथ-साथ दिमाग की सूजन की समस्या हो सकती हैं....ये वायरस मुख्य रूप से 9 से 14 वर्ष की उम्र के बच्चों को प्रभावित करता है....इस वायरस से बचाव के लिए सबसे पहले, मच्छरों से बचाव करना जरूरी है, क्योंकि यह मच्छरों के काटने से फैलता है. इसके लिए मच्छरदानी का इस्तेमाल करें, घर के आसपास पानी जमा न होने दें, और फुल आस्तीन के कपड़े पहनें.
चांदिपुरा वायरस गुजरात के बाद अब राजस्थान में भी दस्तक दे चुका है
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक राजस्थान के डूंगरपुर जिले में 3 साल के बच्चे को चांदीपुरा वायरस पॉजिटिव होने की पुष्टि हुई है, जिसके बाद राजस्थान सरकार और चिकित्सा विभाग अलर्ट मोड में हो गया है. बता दें कि बच्चे का सैंपल लेकर 12 जुलाई पुणे की चांदीपुरा डायग्नोसिस लेब में जांच के लिए भेजा गया था,जहां बच्चे के चांदीपुरा वायरस पॉजिटिव होने की पुष्टि हुई है।मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, गुजरात और चांदीपुरा क्षेत्र में पिछले कुछ दिनों में इस वायरस के कारण कई बच्चों की मौत हुई है, जिससे लोगों के बीच चिंता बढ़ गई है. जानें आखिर क्या है ये वायरस...
क्या है चांदीपुरा वायरस?
चांदीपुरा वायरस एक गंभीर वायरस है, जिसकी पहला मामला 1965 में भारत के महाराष्ट्र राज्य के चांदीपुरा गांव में देखने को मिला था. हेल्थ एक्सपर्ट्स के मुताबिक यह वायरस रबडोविरिडे परिवार से संबंधित है और मादा फ्लोबोटोमाइन मक्खी, मच्छरों, टिक्स और सैंडफ्लाइज के काटने से फैलता है.
दीपुरा वायरस के लक्षण क्या हैं?
इस स्थिति में बुखार, फ्लू जैसे सामान्य लक्षणों के साथ-साथ एक्यूट एन्सेफलाइटिस यानी दिमाग की सूजन की समस्या हो सकती हैं. इसके कारण संक्रमित व्यक्ति को बुखार, दस्त, उल्टी और शरीर में अकड़न जैसे लक्षण नजर आते हैं. बता दें कि गंभीर मामलों में यह कोमा और यहां तक कि मरीज की जान तक ले सकता है. यह वायरस मुख्य रूप से 9 से 14 वर्ष की उम्र के बच्चों को प्रभावित करता है, जो बच्चों के लिए एक बड़ा खतरा बन गया है.
कैसे करें बचाव?
इस वायरस से बचाव के लिए सबसे पहले, मच्छरों से बचाव करना जरूरी है, क्योंकि यह मच्छरों के काटने से फैलता है. इसके लिए मच्छरदानी का इस्तेमाल करें, घर के आसपास पानी जमा न होने दें, मच्छर भगाने वाले तरल पदार्थों का उपयोग करें और फुल आस्तीन के कपड़े पहनें. इसके अलावा, स्वच्छता का ध्यान रखें, इसके लिए पके हुए भोजन को ढककर रखना और दूषित पानी न पीना और हाथों को बार-बार धोना जरूरी है. वहीं अगर आपको इस वायरस के कोई भी लक्षण दिखाई दें तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें.
WRITTEN BY - DEEPIKA PANDEY
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