भारत ने 1978 में अपना पहला विमेंस वर्ल्ड कप खेला था। तब से लेकर 1 नवंबर 2025 तक टीम एक भी ICC ट्रॉफी नहीं जीत पाई थी। लेकिन रविवार का दिन भारतीय महिला क्रिकेट के इतिहास में सुनहरे अक्षरों में दर्ज हो गया। भारत ने दक्षिण अफ्रीका को 52 रन से हराकर पहला वनडे वर्ल्ड कप अपने नाम किया और 47 साल का सूखा खत्म किया।
DY पाटिल स्टेडियम में खेले गए फाइनल में शेफाली वर्मा फिफ्टी लगाने वाली पहली बैटर बनीं। दीप्ति शर्मा को उनके शानदार प्रदर्शन के लिए प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट चुना गया। वे एक टूर्नामेंट में भारत के लिए सबसे ज्यादा विकेट लेने वाली बॉलर भी बनीं।
दीप्ति शर्मा ने पूरे टूर्नामेंट में 22 विकेट झटके और वे टॉप विकेट टेकर रहीं। अब उनके नाम वर्ल्ड कप में कुल 35 विकेट हो गए हैं, जिससे वे भारत के लिए सबसे ज्यादा विकेट लेने के मामले में दूसरे स्थान पर पहुंच गई हैं। उनसे आगे सिर्फ झूलन गोस्वामी हैं, जिनके नाम 43 विकेट दर्ज हैं।
दीप्ति को प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट का खिताब सिर्फ गेंदबाजी के लिए नहीं, बल्कि उनके ऑलराउंड प्रदर्शन के लिए मिला। उन्होंने 22 विकेट के साथ-साथ 215 रन भी बनाए। वे वर्ल्ड कप इतिहास की पहली महिला खिलाड़ी बनीं जिन्होंने एक ही टूर्नामेंट में 200+ रन और 20+ विकेट दोनों हासिल किए।
भारत ने इस वर्ल्ड कप में कुल 9 मैच खेले। टीम का सफर आसान नहीं रहा — शुरुआत में लगातार 3 मैच हारने के बाद भारत ने शानदार वापसी की। सेमीफाइनल में ऑस्ट्रेलिया जैसी मजबूत टीम को हराकर फाइनल में पहुंची
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