भोपाल डेस्क. भारतीय भौतिक विज्ञानी अशोक सेन को 2026 के ऑस्कर क्लेन मेडल से सम्मानित किया गया है। वे यह सम्मान पाने वाले पहले भारतीय भौतिक विज्ञानी बन गए हैं। अशोक सेन की खोज से क्वांटम सिद्धांत और ब्लैक होल के क्वांटम सिद्धांत से जुड़ी अनसुलझी पहेलियों को सुलझाने में मदद मिलती है। पद्म श्री और पद्म भूषण से सम्मानित सेन ने सैद्धांतिक भौतिकी में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उनके काम को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराहा गया है। यह सम्मान भारतीय विज्ञान समुदाय के लिए गर्व का विषय है।
स्ट्रिंग थ्योरी में अमूल्य योगदान
अशोक सेन को आधुनिक स्ट्रिंग थ्योरी के मुख्य रचनाकारों में से एक माना जाता है। यह सिद्धांत बताता है कि पदार्थ के मूल घटक बिंदु जैसे कण नहीं बल्कि एक-आयामी धागे जैसी छोटी संरचनाएं हैं। इस तरह यह पदार्थ और उनके बीच काम करने वाले बलों की एक एकीकृत व्याख्या पेश करने की कोशिश करता है। सेन के काम ने इस विचार को स्थापित करने में मदद की कि सभी स्ट्रिंग थ्योरी असल में एक ही मूल सिद्धांत की अलग-अलग सीमाएं हैं। उनके शोध ने भौतिकी की समझ को गहराई दी है।
शोध को मिली नई दिशा
पद्म श्री 2001 और पद्म भूषण 2013 से सम्मानित अशोक सेन ने कई महत्वपूर्ण सैद्धांतिक खोजों के जरिए शोध के क्षेत्र को नई दिशा दी है। इनमें 2012 का ब्रेकथ्रू प्राइज इन फंडामेंटल फिजिक्स भी शामिल है। उनके योगदान ने क्वांटम गुरुत्वाकर्षण और स्ट्रिंग थ्योरी के क्षेत्र में नई संभावनाएं खोली हैं। सेन के शोध ने जटिल सैद्धांतिक समस्याओं को हल करने में मदद की है। भारतीय वैज्ञानिकों के लिए वे प्रेरणा स्रोत बने हुए हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनके काम को मान्यता मिलती रही है।
ऑस्कर क्लेन मेडल का इतिहास
1988 में शुरू किया गया यह मेडल स्वीडिश भौतिक विज्ञानी ऑस्कर क्लेन के नाम पर रखा गया है। इसे हर साल स्टॉकहोम यूनिवर्सिटी और रॉयल स्वीडिश एकेडमी ऑफ साइंसेज की नोबेल कमिटी फॉर फिजिक्स द्वारा प्रदान किया जाता है। ऑस्कर क्लेन की स्मृति में ऑस्कर क्लेन मेमोरियल लेक्चर्स की आयोजन समिति हर साल एक प्रतिष्ठित शोधकर्ता को आमंत्रित करती है। वह स्मारक व्याख्यान देता है और क्लेन मेडल प्राप्त करता है। यह सम्मान सैद्धांतिक भौतिकी के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए दिया जाता है।
स्टॉकहोम में व्याख्यान
सेन ने 22 अक्टूबर को स्टॉकहोम के अल्बानोवा यूनिवर्सिटी सेंटर में ग्रेविटी फ्रॉम स्ट्रिंग्स एंड स्ट्रिंग्स फ्रॉम ग्रेविटी शीर्षक से व्याख्यान दिया। अपने व्याख्यान में उन्होंने बताया कि कैसे स्ट्रिंग थ्योरी गुरुत्वाकर्षण के एक सुसंगत क्वांटम सिद्धांत की ओर ले जाती है। उन्होंने ब्लैक होल के क्वांटम सिद्धांत से जुड़ी चीजों को समझने में स्ट्रिंग थ्योरी की सहायता की भी चर्चा की। उनके व्याख्यान को वैज्ञानिक समुदाय में सराहा गया। यह अवसर उनके लंबे शोध योगदान का सम्मान था।
आईसीटीएस और बधाई संदेश
इंटरनेशनल सेंटर फॉर थ्योरेटिकल साइंसेज यानी ICTS के निदेशक राजेश गोपकुमार ने सेन को बधाई देते हुए कहा कि हम सभी की ओर से अशोक को बहुत-बहुत बधाई। हमारे साथ अशोक का होना और ICTS में उत्कृष्टता का एक मानक स्थापित करना सच में बहुत शानदार रहा है। सेन के इस सम्मान से पूरे संस्थान में खुशी की लहर है। भारतीय वैज्ञानिक समुदाय ने भी उनकी उपलब्धि पर गर्व व्यक्त किया है। यह सम्मान युवा शोधकर्ताओं के लिए प्रेरणादायक है।