भोपाल डेस्क. वैज्ञानिकों ने एक नई कंपोजिट फिल्म विकसित की है जो इमारतों की सतह पर तापमान प्रबंधन के लिए दो अलग-अलग तरीके अपना सकती है। यह फिल्म वैनेडियम डाइऑक्साइड यानी VO₂ आधारित जेनस कंपोजिट फिल्म है। एडवांस्ड फंक्शनल मैटेरियल्स जर्नल में प्रकाशित अध्ययन में बताया गया है कि फिल्म का एक पक्ष सौर प्रकाश को अवशोषित कर तापीय ऊर्जा में बदलता है जबकि दूसरा पक्ष सौर प्रकाश को परावर्तित कर अवरक्त विकिरण के माध्यम से ताप छोड़ता है। इमारतों में दिन भर तापमान परिवर्तन होते रहते हैं जिससे आंतरिक आराम बनाए रखने में काफी ऊर्जा खर्च होती है। यह नई सामग्री उसी समस्या का समाधान प्रस्तुत करती है। वैज्ञानिकों का मानना है कि यह तकनीक भविष्य की स्मार्ट बिल्डिंग सतहों का आधार बन सकती है।
दो तरफा थर्मल प्रबंधन की अनोखी खासियत
फिल्म को जानबूझकर दो अलग थर्मल सतहों के साथ डिजाइन किया गया है। एक तरफ फोटोथर्मल परत है जो सौर ऊर्जा को अवशोषित कर गर्मी पैदा करती है। दूसरी तरफ रेडिएटिव कूलिंग परत है जो सौर ऊर्जा को परावर्तित करती है और ताप को विकिरण के रूप में बाहर छोड़ती है। इस दोहरी क्षमता के कारण फिल्म मौसम और जरूरत के अनुसार हीटिंग या कूलिंग मोड में काम कर सकती है। इमारतों की बाहरी सतह पर लगाने से यह आंतरिक तापमान को नियंत्रित रखने में मदद करेगी। ऊर्जा की खपत कम होने से पर्यावरणीय लाभ भी होगा। शोधकर्ताओं ने इसे व्यावहारिक अनुप्रयोग के लिए उपयुक्त बताया है।
पेंगुइन पंखों से मिली जैविक प्रेरणा
हालांकि नई फिल्म पेंगुइन पंखों से नहीं बनी है लेकिन इसका डिजाइन प्राकृतिक सामग्रियों के ताप प्रबंधन अध्ययन से प्रेरित है। 2019 में एक्टा बायोमटेरियालिया में प्रकाशित शोध में पेंगुइन पंखों और ध्रुवीय भालू के बालों की विस्तृत जांच की गई थी। उच्च रिज़ॉल्यूशन स्कैनिंग इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोपी से रेशों और छिद्रों के आकार, व्यवस्था और त्रि-आयामी संरचना का अध्ययन किया गया। दोनों प्राकृतिक सामग्रियों में जटिल और पदानुक्रमित छिद्रयुक्त संरचनाएं पाई गईं। पेंगुइन पंखों में शाखाओं वाली और छिद्रयुक्त विशेषताएं उनकी इन्सुलेटिंग क्षमता और जल प्रतिरोध में योगदान करती हैं। 2026 के शोध ने इसी जैविक प्रेरणा को सिंथेटिक सामग्री में लागू किया।
फोटोथर्मल परत की उच्च अवशोषण क्षमता
VO₂ आधारित फोटोथर्मल परत की सौर अवशोषण क्षमता 94.5 प्रतिशत बताई गई है। इसका मतलब है कि यह आने वाले अधिकांश सौर विकिरण को अवशोषित कर लेती है और उसे तापीय ऊर्जा में बदल देती है। ठंडे मौसम या कम तापमान की स्थिति में यह परत इमारत को गर्म रखने में सहायक होगी। उच्च अवशोषण दर के कारण यह परत कुशलतापूर्वक काम करती है। वैज्ञानिकों ने इसे विशेष रूप से सौर ताप संग्रह के लिए अनुकूलित किया है। इस क्षमता के कारण फिल्म पारंपरिक हीटिंग सिस्टम पर निर्भरता कम कर सकती है। ऊर्जा बचत की दृष्टि से यह विशेषता महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
रेडिएटिव कूलिंग परत की उल्लेखनीय विशेषताएं
फिल्म की रेडिएटिव कूलिंग परत में 90 प्रतिशत से अधिक सौर परावर्तन क्षमता है। साथ ही इसकी मध्य-अवरक्त उत्सर्जन क्षमता 97.1 प्रतिशत तक पहुंचती है। ये गुण इसे सौर ऊर्जा को परावर्तित करने और तापीय विकिरण छोड़ने में सक्षम बनाते हैं। गर्म मौसम में यह परत इमारत को ठंडा रखने में मदद करेगी। उच्च परावर्तन और उत्सर्जन के संयोजन से यह परत प्रभावी कूलिंग प्रदान करती है। पारंपरिक एयर कंडीशनिंग सिस्टम की तुलना में यह निष्क्रिय कूलिंग का विकल्प प्रस्तुत करती है। वैज्ञानिकों का मानना है कि दोनों परतों का संयोजन साल भर थर्मल प्रबंधन संभव बनाएगा।
इमारतों में ऊर्जा बचत और भविष्य की संभावनाएं
यह तकनीक इमारतों की ऊर्जा खपत को काफी कम करने की दिशा में आशा जगाती है। दिन के अलग-अलग समय और मौसम में तापमान नियंत्रण के लिए अतिरिक्त ऊर्जा खर्च करने की जरूरत घटेगी। नवीकरणीय और निष्क्रिय थर्मल प्रबंधन से कार्बन उत्सर्जन में भी कमी आ सकती है। शोधकर्ताओं ने इसे व्यावसायिक अनुप्रयोग के लिए आगे विकसित करने की संभावना जताई है। पेंगुइन जैसी प्राकृतिक संरचनाओं से प्रेरणा लेकर मानव निर्मित सामग्री बनाना बायोमिमेटिक्स का सफल उदाहरण है। भविष्य में ऐसी स्मार्ट सतहें शहरों की इमारतों का आम हिस्सा बन सकती हैं। ऊर्जा संकट और जलवायु चुनौतियों के बीच यह नवाचार महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।