नई दिल्ली. भारत-तिब्बत सीमा पुलिस के महानिदेशक शत्रुजीत कपूर ने एक कार्यक्रम में कहा कि पिछले कुछ समय से अरुणाचल प्रदेश में ITBP के जवान और PLA के सैनिक आमने-सामने आए हैं। यह स्थिति बदली नहीं है। उनके इस बयान के बाद कांग्रेस और विपक्ष ने केंद्र सरकार को घेरना शुरू कर दिया है। विपक्ष द्वारा इस मुद्दे को लेकर सरकार की चुप्पी पर सवाल उठाए जा रहे हैं। कहा जा रहा है कि इस वर्ष जुलाई में उत्तर-पूर्वी सीमा पर तनाव शुरू होने के उपरांत पहली बार आधिकारिक रूप से इसकी पुष्टि हुई है। अरुणाचल प्रदेश के सुबनसिरी जिले के असाफिला और माजा इलाके में यह तनाव बना हुआ है।
विदेश मंत्रालय का रुख और द्विपक्षीय प्रयास
सीमा पर तनाव के खुलासे और विपक्षी हमलों के बाद विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि वास्तविक नियंत्रण रेखा से जुड़े विवादों को सुलझाने के लिए दोनों देश लगातार प्रयासरत हैं। दोनों पक्ष महसूस करते हैं कि भारत-चीन के बेहतर रिश्ते सीमा की शांति पर ही निर्भर करते हैं। जुलाई से अब तक दोनों देशों के बीच तीन उच्चस्तरीय बैठकें हुई हैं लेकिन तनाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। इस दौरान ब्रिक्स सम्मेलन में भाग लेने के लिए चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग भारत भी आ चुके हैं। सीमा विवादों को लेकर निरंतर संवाद बनाए रखने पर जोर दिया जा रहा है।
कांग्रेस और विपक्ष का केंद्र पर हमला
कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि जुलाई से सीमा पर तनाव होने की खबरों को देश से छिपाया गया है। विपक्ष का कहना है कि सरकार ने इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर चुप्पी साध रखी थी। अरुणाचल को भारतीय संप्रभु हिस्से के रूप में अंतरराष्ट्रीय मान्यता के बावजूद चीन द्वारा उसे दक्षिण तिब्बत कहना उसके नापाक इरादों को दर्शाता है। विपक्षी दलों ने मांग की है कि सीमा की वास्तविक स्थिति से देश को अवगत कराया जाए। केंद्र सरकार पर पारदर्शिता की कमी का आरोप लगाया जा रहा है। इस मुद्दे पर सियासी बहस तेज हो गई है।
ITBP महानिदेशक का विस्तृत बयान
ITBP के महानिदेशक शत्रुजीत कपूर ने वार्षिक हिमवीर सम्मान समारोह के दौरान कहा कि अरुणाचल सीमा पर तनाव के दौरान ITBP के कमांडो मुस्तैद रहे हैं। उन्होंने बताया कि नई गठित शौर्य कमांडो टीमों ने इस दौरान महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। राजस्थान के अलवर स्थित सेंट्रल ट्रेनिंग कॉलेज में आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने चीन की उन्नत सैन्य तकनीकों के मुकाबले के लिए आधुनिक हथियारों की जरूरत पर जोर दिया। पारंपरिक हथियारों और तरीकों से चीन का मुकाबला करना मुश्किल होगा क्योंकि चीन ने बुनियादी ढांचे और हथियारों के आधुनिकीकरण में भारी निवेश किया है।
आधुनिक युद्ध और ITBP का आधुनिकीकरण
ITBP महानिदेशक ने आधुनिक युद्धों के तौर-तरीकों में आ रहे बदलावों का जिक्र करते हुए कहा कि आज ड्रोन जैसी तकनीक से छोटे देश भी बड़े देशों का मुकाबला कर रहे हैं। उन्होंने ईरान द्वारा अमेरिका का मुकाबला करने तथा यूक्रेन द्वारा रूस को पहुंचाए जा रहे नुकसान का उदाहरण दिया। ITBP के आधुनिकीकरण के लिए चार हजार करोड़ का बजट बनाया गया है जिसमें से एक हजार करोड़ रुपये ड्रोन शक्ति बढ़ाने पर खर्च किए जाएंगे। एंटी ड्रोन सिस्टम मजबूत करने के लिए ड्रोन प्लाटून बनाई गई हैं और ड्रोन पायलटों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। अपने ड्रोन खुद बनाने पर भी काम चल रहा है।
सीमा सुरक्षा के लिए भविष्य की तैयारियां
भूमिगत शेल्टर बनाने पर भी जोर दिया जा रहा है क्योंकि आने वाले समय में भूमिगत ढांचे स्थायी सुरक्षा व्यवस्था का हिस्सा होंगे। भारत और चीन के बीच साढ़े तीन हजार किलोमीटर लंबी सीमा से जुड़े विवादों को लेकर देश चिंतित रहा है। 1962 के चीनी हमले और गलवान की घटना की यादें अभी ताजा हैं। भविष्य में गलवान जैसा संघर्ष सामने न आए इसके लिए अभी से तैयारी करने की जरूरत है। ITBP की तैयारियों और आधुनिकीकरण से सीमा सुरक्षा को और मजबूत बनाने का प्रयास किया जा रहा है। सतर्कता और क्षमता दोनों पर समान ध्यान दिया जा रहा है।