नंदीग्राम: पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम विधानसभा सीट पर उपचुनाव के लिए मतदान के दौरान राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। कांग्रेस और CPI की ओर से बूथ एजेंटों को परेशान करने और उन्हें मतदान केंद्रों पर बैठने से रोकने के आरोप लगाए गए हैं। इसी बीच कांग्रेस के एक ब्लॉक अध्यक्ष को पुलिस द्वारा हिरासत में लिए जाने की खबर सामने आई है। चुनाव से पहले कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान की गिरफ्तारी और अब मतदान के दिन सामने आ रहे आरोपों ने नंदीग्राम चुनाव को चर्चा में ला दिया है।
नंदीग्राम में मतदान के बीच बढ़ा तनाव
नंदीग्राम विधानसभा सीट पर मंगलवार को उपचुनाव के लिए मतदान हो रहा है। मतदान शुरू होने के साथ ही कुछ इलाकों से राजनीतिक विवाद और शिकायतों की खबरें सामने आने लगीं। कांग्रेस और CPI उम्मीदवारों की ओर से आरोप लगाया गया है कि उनके पोलिंग एजेंटों को कई बूथों पर बैठने नहीं दिया गया।
CPI प्रत्याशी ने मारपीट का लगाया आरोप
उपचुनाव से पहले भी नंदीग्राम में राजनीतिक टकराव की घटनाओं के आरोप सामने आए थे। CPI उम्मीदवार शांतिगोपाल गिरी के साथ कथित तौर पर मारपीट किए जाने की शिकायत को लेकर इलाके में तनाव की स्थिति बनी थी। इस मामले में अलग-अलग पक्षों की ओर से एक-दूसरे पर आरोप लगाए गए।
कांग्रेस के बूथ अध्यक्ष को पुलिस ने हिरासत में लिया
मतदान के दौरान कांग्रेस के एक ब्लॉक अध्यक्ष को पुलिस द्वारा हिरासत में लिए जाने की जानकारी सामने आई है। रिपोर्टों के मुताबिक, एसके अशराफुल्लाह कांग्रेस के बूथ एजेंट भी थे। उनकी हिरासत को लेकर कांग्रेस ने आपत्ति जताई है और इसे मतदान प्रक्रिया से जोड़कर सवाल उठाए हैं।
कांग्रेस उम्मीदवार ने एजेंट को उठाए जाने का लगाया आरोप
कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान ने भी अपने पोलिंग एजेंट को कथित तौर पर ले जाने का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि इलाके में पिछले दो दिनों से कुछ लोग सक्रिय हैं और उनके एजेंट को वहां से ले जाया गया। प्रधान के मुताबिक, मामले की जानकारी चुनाव अधिकारियों को दी गई, लेकिन अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई।
चुनाव से पहले मिलन प्रधान की गिरफ्तारी भी बनी मुद्दा
नंदीग्राम उपचुनाव शुरू होने से पहले कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान की गिरफ्तारी ने भी राजनीतिक विवाद खड़ा किया था। पुलिस के मुताबिक, उनके खिलाफ 2007 के नंदीग्राम आंदोलन से जुड़े कई पुराने गैर-जमानती मामलों में वारंट लंबित थे। इनमें हत्या, हत्या के प्रयास, दंगा, अपहरण और आपराधिक धमकी जैसे आरोप शामिल बताए गए थे। बाद में कलकत्ता हाईकोर्ट से अंतरिम राहत मिलने के बाद उन्हें जेल से रिहा किया गया और उन्होंने चुनाव प्रचार दोबारा शुरू किया।
मतदान से एक दिन पहले बदले गए नंदीग्राम थाना प्रभारी
नंदीग्राम में चुनावी माहौल को देखते हुए निर्वाचन आयोग ने मतदान से एक दिन पहले नंदीग्राम थाने के प्रभारी को भी बदल दिया था। यह फैसला विपक्षी दलों की ओर से स्थानीय पुलिस की भूमिका और विपक्षी समर्थकों को कथित तौर पर धमकाए जाने की शिकायतों के बाद लिया गया। नए अधिकारी के रूप में देबाशीष सरकार को जिम्मेदारी दी गई।
BJP ने आरोपों को किया खारिज
वहीं, BJP उम्मीदवार हसिरानी रथ ने विपक्ष की ओर से लगाए जा रहे आरोपों को खारिज किया है। उनका कहना है कि कई मामलों में विपक्ष के पास पर्याप्त पोलिंग एजेंट ही नहीं हैं और इसी वजह से इस तरह की शिकायतें की जा रही हैं। उन्होंने मतदान शांतिपूर्ण तरीके से होने की बात कही और चुनाव आयोग द्वारा स्थिति पर नजर रखे जाने का दावा किया।
नंदीग्राम में सुरक्षा के बीच हो रहा मतदान
विपक्षी दलों की शिकायतों और चुनावी संवेदनशीलता को देखते हुए नंदीग्राम में सुरक्षा व्यवस्था पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। इसके बावजूद मतदान के शुरुआती घंटों में एजेंटों को लेकर सामने आए आरोपों ने चुनाव प्रक्रिया की निगरानी और पारदर्शिता को लेकर सवाल खड़े किए हैं। फिलहाल इन आरोपों पर संबंधित प्रशासन और निर्वाचन अधिकारियों की कार्रवाई पर नजर बनी हुई है।