भारत के चीनी उद्योग के लिए वर्ष 2025-26 सकारात्मक संकेत लेकर आया है। अखिल भारतीय चीनी व्यापार संघ AISTA की ओर से जारी नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार, फरवरी 2026 तक देश से कुल 2,01,547 टन चीनी का निर्यात किया गया है। यह आंकड़ा दिखाता है कि वैश्विक मांग में भारत की हिस्सेदारी लगातार मजबूत बनी हुई है, जबकि घरेलू स्तर पर निर्यात कोटा प्रणाली लागू है जिसके तहत मिलों को निर्यात की अनुमति आनुपातिक रूप से दी जाती है।
निर्यात कोटा और सरकारी नीति
केंद्र सरकार द्वारा वर्ष 2025-26 के लिए कुल 20 लाख टन चीनी निर्यात की मंजूरी दी गई है, जिसमें हाल ही में स्वीकृत अतिरिक्त पांच लाख टन का कोटा भी शामिल है। यह नीति घरेलू उपलब्धता और वैश्विक बाज़ार परिस्थितियों के बीच संतुलन बनाए रखने के उद्देश्य से लागू की गई है। निर्यात की अनुमति मिलने के बाद विभिन्न राज्यों की मिलें आनुपातिक वितरण के आधार पर अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों में अपनी हिस्सेदारी सुनिश्चित कर रही हैं।
प्रमुख गंतव्य: यूएई शीर्ष पर
रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि संयुक्त अरब अमीरात (United Arab Emirates) भारतीय चीनी का सबसे बड़ा आयातक बना रहा। फरवरी तक कुल 47,006 टन चीनी यूएई को भेजी गई। इसके बाद यूरो-एशियाई क्षेत्र में स्थित अफ़ग़ानिस्तान को 46,163 टन, अफ्रीकी देश Djibouti को 30,147 टन और हिमालयी पड़ोसी देश भूटान को 20,017 टन चीनी का निर्यात हुआ। इन चार देशों में सबसे ज़्यादा मांग दर्ज की गई, जिससे भारत की निर्यात क्षमता पर सकारात्मक प्रभाव पड़ा है।
सफेद और परिष्कृत चीनी का अनुपात
एआईएसटीए द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, कुल निर्यात में सबसे बड़ी हिस्सेदारी सफेद चीनी की रही, जो 1,63,000 टन दर्ज की गई। इसके अलावा 37,638 टन परिष्कृत चीनी का भी निर्यात किया गया। यह वितरण संकेत देता है कि वैश्विक बाज़ार में भारतीय सफेद चीनी की गुणवत्ता और मांग काफी मजबूत बनी हुई है, जबकि परिष्कृत चीनी की हिस्सेदारी भी स्थिर रूप से बढ़ रही है।
उत्पादन में 13 प्रतिशत वृद्धि का अनुमान
एआईएसटीए ने अपने पहले उत्पादन अनुमान में कहा है कि सितंबर 2026 में समाप्त होने वाले विपणन वर्ष में भारत का चीनी उत्पादन 13 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ 2.96 करोड़ टन तक पहुंच सकता है। यह अनुमान एथनॉल उत्पादन के लिए चीनी के डायवर्जन को छोड़कर लगाया गया है। उत्पादन में वृद्धि से न केवल घरेलू मांग की पूर्ति सुचारू रहेगी बल्कि निर्यात के अवसर भी और बढ़ने की उम्मीद है। उद्योग निकाय ने सरकार द्वारा अतिरिक्त पांच लाख टन निर्यात कोटा स्वीकृत करने के निर्णय का स्वागत किया है, जिसे मिलों के लिए प्रोत्साहन और उद्योग के विस्तार की दृष्टि से महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
भविष्य की संभावनाएँ और निर्यात का परिदृश्य
भारत की चीनी उद्योग नीति, निर्यात कोटा व्यवस्था और वैश्विक मांग का संगम यह दर्शाता है कि आने वाले महीनों में चीनी निर्यात और बढ़ सकता है। उत्पादन में संभावित वृद्धि और प्रमुख गंतव्यों से लगातार मिल रहे ऑर्डर दर्शाते हैं कि भारत इस वर्ष वैश्विक चीनी व्यापार में और अधिक मजबूत स्थिति में पहुंच सकता है। सरकार और उद्योग जगत के बीच बेहतर समन्वय से यह गति और अधिक तेज़ हो सकती है, जिससे निर्यात और उत्पादन दोनों के मोर्चे पर उल्लेखनीय वृद्धि संभव है।
Comments (0)