अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव ने ग्लोबल मार्केट में अस्थिरता को गहरा कर दिया है। भू-राजनीतिक जोखिम जितना बढ़ता है, निवेशक उतनी तेजी से सुरक्षित एसेट की ओर रुख करते हैं, जिसका सीधा असर सोना और चांदी की कीमतों पर दिखाई पड़ रहा है। ताजा संकेत यही बताते हैं कि हालात और बिगड़े तो देश-दुनिया के कीमती धातुओं के बाजार में बड़ा उछाल देखने को मिलेगा।
सोने में हो सकता है ऐतिहासिक उछाल
मार्केट एक्सपर्ट का मानना है कि यदि अमेरिका की ओर से ईरान पर मिसाइल हमला होता है और युद्ध जैसी स्थिति बनती है, तो सोने की कीमतों में अभूतपूर्व तेजी दर्ज की जा सकती है। उन्होंने अनुमान जताया है कि ऐसी परिस्थिति में सोना 10 ग्राम का रेट ₹1,64,000 तक पहुंच सकता है, जो अब तक का सबसे ऊंचा स्तर होगा। वैश्विक बाजार में अनिश्चितता बढ़ते ही गोल्ड सेफ-हेवन एसेट के रूप में सबसे पहले आकर्षण का केंद्र बनता है।
चांदी में भी दिखेगी आग, कीमतें छू सकती हैं नई ऊंचाइयां
सोने के साथ-साथ चांदी की कीमतों में भी जोरदार उछाल का अनुमान व्यक्त किया जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार तनाव बढ़ने और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल से महंगाई का दबाव बढ़ेगा, जिसका सीधा असर चांदी की कीमतों पर पड़ेगा। मार्केट प्रोजेक्शन के मुताबिक यदि हालात युद्ध में बदलते हैं, तो चांदी ₹2,70,000 प्रति किलोग्राम तक जा सकती है, जो बाजार के लिए एक रिकॉर्ड स्तर होगा।
कच्चे तेल में उछाल से बढ़ेगा महंगाई का दबाव
अमेरिका-ईरान तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में भी बढ़ोतरी की आशंका है। तेल महंगा होते ही वैश्विक महंगाई में बढ़ोतरी होती है, जिससे निवेशक जोखिम वाले बाजारों से हटकर सोना-चांदी की ओर जाते हैं। इस स्थिति में कीमती धातुओं की मांग तेजी से बढ़ सकती है, जिसके चलते उनकी कीमतों में और अधिक तेजी आने की संभावना बनती है।
निवेशकों का भरोसा सुरक्षित विकल्पों पर
अंतरराष्ट्रीय संघर्ष, युद्ध या भू-राजनीतिक संकट के दौरान निवेशकों का भरोसा हमेशा सुरक्षित निवेश साधनों की ओर जाता है। सोना और चांदी ऐसे ही एसेट हैं जिन्हें आर्थिक अस्थिरता का सुरक्षित कवच माना जाता है। यही वजह है कि जैसे-जैसे अमेरिका-ईरान टकराव बढ़ रहा है, बाजार में गोल्ड-सिल्वर की खरीदारी बढ़ती जा रही है, और आने वाले दिनों में कीमतें और तेज हो सकती हैं।
क्या आगे भी बनी रहेगी तेजी?
विशेषज्ञों का कहना है कि बाजार की दिशा सीधे-सीधे भू-राजनीतिक घटनाओं पर निर्भर करेगी। यदि दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ता है तथा कोई सैन्य कार्रवाई होती है, तो सोना-चांदी नई ऐतिहासिक बुल रन में प्रवेश कर सकते हैं। हालांकि, यदि कूटनीतिक समाधान निकलता है, तो कीमतों में स्थिरता या आंशिक गिरावट भी संभव है। फिलहाल बाजार की निगाहें हालात पर टिकी हुई हैं और निवेशकों में सतर्कता बढ़ गई है।
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