मध्यप्रदेश माध्यमिक शिक्षा मंडल से संबद्ध विद्यालयों में कक्षा 9वीं और 11वीं की परीक्षा प्रणाली में बड़ा बदलाव किया गया है। अब इन कक्षाओं में भी 10वीं और 12वीं की तरह वर्ष में दो बार वार्षिक परीक्षा आयोजित की जाएगी। इस संबंध में लोक शिक्षण संचालनालय (डीपीआई) ने दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं। नई व्यवस्था के तहत पूरक परीक्षा की जगह द्वितीय वार्षिक परीक्षा आयोजित होगी, जिससे विद्यार्थियों को असफल होने या कम अंक आने की स्थिति में दूसरा अवसर मिल सकेगा।
23 फरवरी से पहली परीक्षा, मार्च-अप्रैल में दूसरा मौका
डीपीआई के निर्देशानुसार पहली वार्षिक परीक्षा 23 फरवरी से शुरू होगी। इसके बाद मार्च या अप्रैल में द्वितीय वार्षिक परीक्षा आयोजित की जाएगी, जिसकी विस्तृत समय-सारिणी जल्द जारी होगी। इस फैसले का सीधा असर प्रदेश के करीब 20 लाख विद्यार्थियों पर पड़ेगा। सभी स्कूलों को नई व्यवस्था के अनुरूप तैयारी करने के निर्देश दिए गए हैं।
फेल, अनुपस्थित या कम अंक वाले छात्रों को राहत
नई प्रणाली के तहत जो विद्यार्थी मुख्य परीक्षा में एक या अधिक विषयों में अनुत्तीर्ण होंगे या किसी कारण से अनुपस्थित रहेंगे, उन्हें द्वितीय परीक्षा में शामिल होने का अवसर मिलेगा। इसके साथ ही जो विद्यार्थी उत्तीर्ण हैं, वे भी अंक सुधार के लिए दोबारा परीक्षा दे सकेंगे। हालांकि द्वितीय परीक्षा में बैठने के लिए निर्धारित शुल्क के साथ आवेदन करना अनिवार्य होगा और विषय परिवर्तन की अनुमति नहीं होगी। प्रायोगिक विषयों में केवल अनुत्तीर्ण भाग की ही दोबारा परीक्षा दी जा सकेगी।
छात्रों पर दबाव कम करने की कोशिश
डीपीआई के अपर संचालक डीएस कुशवाहा के अनुसार नौवीं और 11वीं में पहली बार द्वितीय वार्षिक परीक्षा आयोजित की जा रही है। इससे विद्यार्थियों को परिणाम सुधारने का बेहतर अवसर मिलेगा और परीक्षा प्रणाली अधिक छात्रहितैषी बनेगी। शिक्षा विभाग का मानना है कि यह कदम छात्रों पर असफलता का दबाव कम करने की दिशा में अहम साबित होगा।
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