राजपाल यादव के जीवन की शुरुआत कठिनाइयों से भरी रही। उनकी पहली पत्नी करुणा, जिनसे उनकी 1991 में शादी हुई थी, प्रसव के दौरान दुनिया छोड़ गईं। इस घटना ने राजपाल को मानसिक रूप से तोड़ दिया और वह लंबे समय तक इस सदमे से उभर नहीं पाए। लेकिन समय ने उन्हें आगे बढ़ने का अवसर दिया और वर्ष 2003 में राधा उनके जीवन में आईं। राधा ने न केवल उनके जीवन को नया सहारा दिया, बल्कि हर समस्या के समय मज़बूती से साथ खड़ी रहीं।
क्यों संभालती हैं राधा भाभी 15 बच्चों की ज़िम्मेदारी
राजपाल यादव की तीन बेटियां हैं—पहली पत्नी से एक और राधा से दो। इसके बावजूद उनके परिवार में 15 बच्चे हैं, जिनकी जिम्मेदारी वे स्वयं उठाते हैं। ये सभी बच्चे उनके भाइयों के हैं, जो कुल छह हैं। राजपाल का मानना है कि उनके भाइयों ने हमेशा उनका साथ दिया, इसलिए आर्थिक और पारिवारिक रूप से सक्षम होने के बाद वह परिवार का कर्ज चुकाने की भावना से इन सभी बच्चों को अपना मानकर उनकी परवरिश का दायित्व अपने कंधों पर ले चुके हैं। राधा इस जिम्मेदारी को ऐसी निष्ठा से निभा रही हैं कि बच्चे उन्हें राधा भाभी नहीं, बल्कि मां की तरह देखते हैं।
परिवार के 15 बच्चों का भविष्य गढ़ने की जिम्मेदारी
इन 15 बच्चों में से कौन क्या करेगा, इसकी पूरी योजना राधा भाभी तैयार करती हैं। कोई बच्चा लॉ की पढ़ाई कर रहा है, कोई क्रिकेटर बनने की राह पर है और एक बच्चा अभिनय की पढ़ाई कर रहा है। अभिनय सीखने वाला बच्चा Anupam Kher के इंस्टिट्यूट में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहा है। सभी बच्चे राजपाल यादव को पिता समान मानते हैं और उन्हें ‘पापा’ कहकर पुकारते हैं।
राधा भाभी का समर्पण, जो बदल रहा है परिवार का भविष्य
राजपाल की व्यस्त फिल्मी दुनिया के बीच राधा का योगदान बेहद महत्वपूर्ण है। वह न केवल घर और बच्चों का प्रबंधन करती हैं, बल्कि सभी बच्चों की शिक्षा, अनुशासन, दिनचर्या और करियर को लेकर पूरी योजना बनाती हैं। राजपाल यादव का कहना है कि वह इसलिए निश्चिंत होकर काम कर पाते हैं क्योंकि राधा ने घर की नैया को संभाल रखा है। इस अनूठे परिवार में राधा भाभी सिर्फ पत्नी नहीं, बल्कि एक मार्गदर्शक, संरक्षक और भावनात्मक स्तंभ हैं।
15 बच्चों की परवरिश से रचे गए परिवार और मानवता के नए आयाम
राजपाल और राधा की यह कहानी उस भारतीय पारिवारिक मूल्य की मिसाल है, जहां खून का रिश्ता केवल जन्म से नहीं, बल्कि जिम्मेदारी और प्रेम से भी बनता है। यह कहानी बताती है कि इंसान केवल अपने बच्चों के लिए नहीं, बल्कि पूरे परिवार, समाज और आने वाली पीढ़ियों के लिए उम्मीद का स्रोत बन सकता है। राजपाल यादव और राधा का यह मानवीय कर्तव्य परिवारिक प्रेम और त्याग की ऐसी मिसाल है, जो प्रेरणा देने के लिए पर्याप्त है।
Comments (0)