आज के समय में अधिकांश महिलाएं भागदौड़ भरी जीवनशैली में खुद के लिए पर्याप्त समय नहीं निकाल पातीं। लंबे समय तक घर और ऑफिस में काम करने, धूप में कम निकलने, सनस्क्रीन के अत्यधिक उपयोग, अनियमित खानपान और पोषणहीन आहार के कारण शरीर में विटामिन डी का स्तर लगातार घटता जाता है। शहरी क्षेत्रों में प्रदूषण की अधिकता भी धूप से मिलने वाले प्राकृतिक विटामिन डी को अवरुद्ध करती है, जिससे इसकी कमी का खतरा और बढ़ जाता है। यही कारण है कि महिलाएं अक्सर कमजोरी, हड्डियों में दर्द और इम्यूनिटी कम होने जैसी समस्याओं से जूझती दिखाई देती हैं।
लक्षण जो बताते हैं कि शरीर में विटामिन डी की कमी हो रही है
चिकित्सकीय विशेषज्ञों के अनुसार महिलाओं में विटामिन डी की कमी के शुरुआती संकेतों में अत्यधिक थकान और कमजोरी प्रमुख हैं। पीठ, कमर और पैरों में लगातार दर्द रहना, जोड़ों में अकड़न, मांसपेशियों में खिंचाव या दर्द भी इसके सामान्य लक्षण हैं। इसके साथ ही इम्यूनिटी कमजोर पड़ने से बार-बार इंफेक्शन होना, सर्दी-जुकाम रहना, मूड स्विंग, बाल झड़ना और नींद की समस्या भी इस कमी की ओर इशारा करते हैं। जब यह कमी बढ़ जाती है, तो यह हड्डियों को कमजोर कर सकती है और लंबे समय में गंभीर स्वास्थ्य जटिलताएं पैदा कर सकती है।
किन महिलाओं में अधिक होता है खतरा
वे महिलाए जो रोजमर्रा की दिनचर्या में सूर्य प्रकाश के संपर्क में बहुत कम आती हैं, उनमें विटामिन डी की कमी का जोखिम सबसे अधिक रहता है। गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं को विटामिन डी की अतिरिक्त मात्रा की आवश्यकता होती है, ऐसे में उनके शरीर में इसकी कमी अधिक तेजी से बढ़ सकती है। मोटापे से ग्रस्त महिलाएं, 40 वर्ष से अधिक आयु की स्त्रियां, हॉर्मोनल असंतुलन से पीड़ित महिलाएं और पोषणहीन आहार लेने वाली महिलाएं भी इस कमी की चपेट में जल्दी आ जाती हैं।
महिलाओं के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभाव
विटामिन डी महिलाओं के लिए केवल हड्डियों को मजबूत बनाए रखने का ही साधन नहीं है, बल्कि यह इम्यून सिस्टम, मानसिक स्वास्थ्य, मांसपेशियों की मजबूती, ऊर्जा स्तर और हार्मोनल संतुलन पर भी प्रभाव डालता है। इसकी कमी होने पर महिलाओं को तनाव, अवसाद, अनिद्रा, बांझपन और थायरॉयड जैसी समस्याओं का भी सामना करना पड़ सकता है। कई बार समय रहते पहचान न होने पर यह ऑस्टियोपोरोसिस जैसी गंभीर बीमारियों का कारण भी बन सकता है।
कैसे करें विटामिन डी की कमी से बचाव
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार रोज़ाना कम से कम 15 से 20 मिनट सुबह की धूप में समय बिताना विटामिन डी का सबसे सरल और प्राकृतिक स्रोत है। आहार में दूध, दही, पनीर, अंडे, मशरूम और फोर्टिफाइड खाद्य पदार्थ शामिल करना भी शरीर में इसकी पूर्ति करता है। नियमित व्यायाम से हड्डियों को मजबूती मिलती है और संपूर्ण स्वास्थ्य बेहतर होता है। यदि कमी अधिक हो जाए, तो चिकित्सक की सलाह से सप्लीमेंट लेना भी आवश्यक हो सकता है। समय-समय पर जांच कराना और शरीर के स्तर पर निगरानी रखना महिलाओं के लिए अत्यंत लाभकारी है।
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