जांच से पहले राज्यपाल की अनुमति अनिवार्य
छत्तीसगढ़ में सरकारी विश्वविद्यालयों से जुड़े अधिकारी, शिक्षक और कर्मचारियों की जांच प्रक्रिया अब पहले जैसी नहीं रहेगी। लोकभवन (राजभवन) से जारी आदेश के मुताबिक अब किसी भी अधिकारी, शिक्षक या कर्मचारी के खिलाफ विभागीय जांच शुरू करने से पहले राज्यपाल की अनुमति लेना अनिवार्य होगा। इतना ही नहीं, जांच पूरी होने के बाद अंतिम निर्णय के लिए भी कुलाधिपति यानी राज्यपाल की स्वीकृति जरूरी होगी।
15 शासकीय विश्वविद्यालयों पर लागू होगा आदेश
राज्य के 15 शासकीय विश्वविद्यालयों से जुड़े अधिनियमों का हवाला देते हुए यह आदेश जारी किया गया है। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि विश्वविद्यालयों में किसी भी नियुक्ति प्रक्रिया या अनुशासनात्मक कार्रवाई से पहले आवश्यक अनुमोदन लिया जाएगा। नई व्यवस्था के तहत कुलसचिव या प्रभारी कुलसचिव को छोड़कर बाकी सभी के मामलों में राज्यपाल की अनुमति जरूरी होगी।
राज्यपाल रमेन डेका के फैसले पर उठे सवाल
राज्यपाल के रूप में रमेन डेका ने पदभार संभालते ही प्रदेश के विभिन्न जिलों का दौरा कर बैठकों और दिशा-निर्देशों की शुरुआत की थी। उनके इन दौरों और बैठकों को लेकर पहले भी सवाल उठते रहे हैं। अब लोकभवन से जारी इस नए आदेश ने एक बार फिर राज्यपाल की भूमिका को लेकर बहस तेज कर दी है।
कांग्रेस का आरोप: शासन के काम में हस्तक्षेप
कांग्रेस ने इस आदेश को राज्य सरकार के अधिकारों में दखल बताया है। कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष धनेंद्र साहू ने आरोप लगाया कि राज्यपाल राजनीति करने की ललक में शासन के कामों में हस्तक्षेप कर रहे हैं।उन्होंने कहा कि कई विधेयक राज्यपाल के हस्ताक्षर के लिए अटके हुए हैं और आरक्षण से जुड़ी फाइलें तीन साल से लंबित हैं। कांग्रेस का आरोप है कि अब शासन की भूमिका कमजोर की जा रही है।
सरकार का बचाव: अधिनियमों के तहत लिया गया फैसला
सरकार की ओर से इस फैसले का समर्थन किया गया है। डिप्टी सीएम अरुण साव ने कहा कि राज्यपाल विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति होते हैं और इस नाते वे विश्वविद्यालयों के सर्वोच्च प्रशासनिक प्रमुख हैं। उन्होंने कहा कि यह निर्णय अधिनियमों के दायरे में लिया गया है और राज्यपाल ने अपने विवेक से यह आदेश जारी किया होगा।
चल रही जांचों पर पड़ सकता है असर
प्रदेश के कई विश्वविद्यालयों में पहले से विभागीय जांच चल रही है। इनमें—
छत्तीसगढ़ कृषि विश्वविद्यालय का बीज घोटाला मामला
बिलासपुर स्थित अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय में कथित भ्रष्टाचार
आदर्श महाविद्यालय लोहारकोट में जेम पोर्टल के जरिए 1.06 करोड़ रुपये की खरीदी
जैसे मामले शामिल हैं। नए आदेश के बाद इन जांचों की गति और प्रक्रिया प्रभावित होने की संभावना जताई जा रही है।
संवैधानिक संतुलन या हस्तक्षेप?
लोकभवन की ओर से कृषि, चिकित्सा और उच्च शिक्षा सचिवों को यह पत्र भेजा गया है। इस आदेश को कोई संवैधानिक निगरानी बता रहा है तो कोई इसे सरकार के कामकाज पर वीटो मान रहा है।अब बड़ा सवाल यही है कि यह फैसला संघीय ढांचे में संतुलन बनाएगा या राज्य सरकार और राज्यपाल के बीच टकराव को और बढ़ाएगा।
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