रायपुर, छत्तीसगढ़: केंद्र सरकार द्वारा मनरेगा (महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना) का नाम बदलकर "विकसित भारत–रोजगार और आजीविका मिशन ग्रामीण" (VB-G-RAM-G) रखने के बाद से राजनीतिक हलकों में हलचल मच गई है। बीजेपी और कांग्रेस दोनों ही इस बदलाव को लेकर जोरदार तरीके से अपनी-अपनी बातें जनता तक पहुंचा रहे हैं।
केंद्र सरकार का दावा और बीजेपी का जन जागरण अभियान
केंद्र सरकार का कहना है कि VB-G-RAM-G योजना केवल ग्रामीण क्षेत्रों में मजदूरी के अवसर नहीं, बल्कि स्थायी रोजगार और आजीविका के अवसर भी प्रदान करेगी। इस बदलाव को लेकर बीजेपी ने देशभर में जन जागरण अभियान शुरू किया है, जिसमें पार्टी कार्यकर्ता घर-घर जाकर नई योजना के फायदे जनता को समझा रहे हैं। बीजेपी का दावा है कि यह योजना गांवों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
विपक्ष का विरोध और कांग्रेस का आंदोलन
वहीं, कांग्रेस इस बदलाव के खिलाफ खुलकर विरोध कर रही है। कांग्रेस ने सदन में सरकार के खिलाफ हंगामा किया और अब सड़क पर उतरकर विरोध करने की तैयारी कर रही है। कांग्रेस ने घोषणा की है कि वह इस योजना को ‘मनरेगा’ ही बनाए रखने के लिए अगले 45 दिनों तक चरणबद्ध आंदोलन करेगी। पार्टी के नेताओं का कहना है कि सरकार "राम के नाम पर छल" कर रही है और लोगों को गुमराह किया जा रहा है। पूर्व उप मुख्यमंत्री टी एस सिंहदेव ने भी इस मुद्दे पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि सरकार अपनी योजनाओं के माध्यम से जनता को धोखा दे रही है।
सरकार और विपक्ष के दावे
कांग्रेस और बीजेपी के बीच इस मुद्दे पर तीखी नोकझोंक जारी है। जहां बीजेपी विकास और आत्मनिर्भरता का दावा कर रही है, वहीं कांग्रेस इसे सरकार के खिलाफ अधिकारों की लड़ाई मान रही है। अब सवाल यह है कि क्या VB-G-RAM-G से ग्रामीण भारत की तस्वीर बदलेगी या मनरेगा के नाम पर ही जनता का विश्वास कायम रहेगा?
बाइट - विष्णुदेव साय, मुख्यमंत्री छत्तीसगढ़ शासन
"नए बिल के जरिए हम ग्रामीण क्षेत्रों को आत्मनिर्भर बनाने के दिशा में एक बड़ा कदम बढ़ा रहे हैं।"
बाइट - टी एस सिंहदेव, पूर्व उप मुख्यमंत्री छत्तीसगढ़
"सरकार राम के नाम पर छल कर रही है। मनरेगा का नाम बदलकर सरकार ने ग्रामीणों के हक को छीना है।"
सियासी टकराव और जनता का रुख
बीजेपी और कांग्रेस दोनों ही अपनी-अपनी स्थिति पर अडिग हैं और इसका असर आगामी चुनावों में देखने को मिल सकता है। अब देखना यह है कि ग्रामीण इलाकों के लोग इस बदलाव को किस रूप में स्वीकार करते हैं, और क्या यह योजना वास्तव में उन्हें स्थायी रोजगार और आजीविका प्रदान कर पाती है।
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