भारत के विदेश सचिव विक्रम मिसरी और चीन के कार्यकारी उप विदेश मंत्री मा झाओक्सू के बीच हुई उच्च स्तरीय बैठक ने दोनों देशों के द्विपक्षीय रिश्तों में नई ऊर्जा भर दी है। चर्चा के दौरान चीन ने पहली बार यह स्वीकार किया कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता की आकांक्षाओं को वह समझता है और उनका सम्मान करता है। यह वक्तव्य न केवल कूटनीतिक तौर पर अहम है बल्कि यह भविष्य की संभावनाओं का भी संकेत देता है।
सीमा पर शांति ही स्थिर संबंधों की कुंजी
दोनों देशों ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि भारत-चीन संबंधों को स्थिर बनाए रखना और सीमा पर शांति कायम रखना क्षेत्रीय स्थिरता के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। ब्रिक्स शेरपा बैठक के अवसर पर हुई इस बातचीत में सीमा पर जारी तकरार को संभालते हुए आगे बढ़ने की प्रतिबद्धता दोहराई गई। विदेश सचिव ने कैलाश मानसरोवर यात्रा को फिर से शुरू करने और इसके विस्तार की उम्मीद भी जताई, जो जन-आस्था से जुड़े इस मुद्दे पर सकारात्मक माहौल बना सकती है।
लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने की तैयारी
बैठक में एसर सर्विस एग्रीमेंट को जल्द अंतिम रूप देने पर सहमति बनी, जो दोनों देशों के बीच वीजा और यात्रा संबंधी व्यवस्थाओं को सुगम बनाने में सहायक होगा। लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने पर दोनों पक्ष खुले मन से आगे बढ़ते दिखाई दिए। यह सहमति इस बात का भी संकेत है कि हाल के वर्षों में बिगड़ी आपसी धारणा में अब सुधार की कोशिशें जारी हैं।
कूटनीतिक समझौते और नेतृत्व की साझा दृष्टि
चीन और भारत दोनों ने स्वीकार किया कि अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य लगातार जटिल हो रहा है और ऐसे में आवश्यक है कि राष्ट्रपति शी जिनपिंग और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच बनी महत्वपूर्ण समझ को जमीनी स्तर पर लागू किया जाए। व्यापक वैश्विक और क्षेत्रीय बदलावों के बीच सहयोग का यह स्वर भविष्य की कूटनीति को व्यावहारिक दिशा दे सकता है।
पटरी पर लौटते रिश्तों का संकेत
गलवान विवाद के बाद लंबे समय तक तनाव के दौर से गुजर रहे भारत-चीन संबंधों में अब सकारात्मक गतिविधियां दिखने लगी हैं। बंद पड़ी कई सेवाओं का फिर से शुरू होना और द्विपक्षीय संवाद की आवृत्ति बढ़ना इस बात का संकेत है कि रिश्ते धीरे-धीरे सामान्य स्थिति की ओर लौट रहे हैं। विदेश मंत्रालय के अनुसार, दोनों पक्षों ने संवेदनशील मुद्दों पर चिंताओं को दूर करने और जन-स्तर पर आदान-प्रदान बढ़ाकर संबंधों को मजबूत करने पर चर्चा की।
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