महाकाल की नगरी उज्जैन इन दिनों दिव्य उल्लास और आध्यात्मिक ऊर्जा से भरी हुई है। संपूर्ण शहर एक पावन उत्सव में डूबा हुआ है, मानो किसी भव्य विवाह समारोह का आयोजन हो रहा हो। महाशिवरात्रि के अवसर पर भगवान महाकाल और माता पार्वती के दिव्य विवाह की तैयारियों ने वातावरण को और भी अधिक पवित्र बना दिया है। मंदिर परिसर को फूलों, रोशनी और आध्यात्मिक सज्जा से सजाया गया है, जिससे श्रद्धालुओं का मन आनंद और भक्ति से भर उठता है।
ढाई बजे खुलेंगे पट, 44 घंटे दर्शनों का महापर्व
महाशिवरात्रि के उपलक्ष्य में शनिवार और रविवार की दरमियानी रात ठीक ढाई बजे महाकाल मंदिर के पट खोले जाएंगे। इसके बाद निरंतर 44 घंटे तक महाकाल के दर्शन का अपूर्व अवसर प्राप्त होगा। मंदिर के गर्भगृह में अखंड महापूजा की व्यवस्था की गई है और दिव्य क्षणों को अनुभव करने के लिए लाखों श्रद्धालु उज्जैन पहुँच रहे हैं। भगवान महाकाल को सवा मन फल-फूलों से बने अद्वितीय सेहरे से अलंकृत किया जाएगा, जो इस पर्व की विशेष आकर्षण का केंद्र रहेगा।
श्रद्धालुओं का सागर और भक्ति की उमंग
प्रशासन के अनुसार इस वर्ष लगभग दस लाख श्रद्धालुओं के आगमन का अनुमान है। दूर-दूर से आए भक्त इस पावन रात्रि के हर क्षण का अनुभव करने के लिए उत्साहित हैं। मंदिर में शिव-पार्वती विवाह की रस्मों के दौरान वातावरण मंत्रोच्चार, ढोल-नगाड़ों और भजनों की गूँज से गूंजायमान रहेगा। यह अद्भुत संगम उज्जैन की आध्यात्मिक महिमा को और भी प्रखर कर देता है।
व्यवस्थाओं में प्रशासन की सतर्कता और सुगमता
श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने व्यापक प्रबंध किए हैं। सामान्य दर्शन, शीघ्र दर्शन और विशिष्ट दर्शन के लिए अलग-अलग मार्ग निर्धारित किए गए हैं ताकि किसी प्रकार की अव्यवस्था न हो। सामान्य श्रद्धालु शनिवार रात बारह बजे से कर्कराज पार्किंग से कतार में लग सकेंगे। प्रशासन का दावा है कि सामान्य दर्शन के लिए लगभग चालीस मिनट और शीघ्र दर्शन टिकटधारकों के लिए लगभग पच्चीस मिनट का समय लगेगा, जिससे सभी भक्त सुगमता से दर्शन कर सकें।
महाकाल की नगरी में भक्ति और सुरक्षा का समन्वय
उज्जैन में सुरक्षा और सुविधा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए पुलिस, प्रशासन और मंदिर समिति ने संयुक्त रूप से एक सुदृढ़ व्यवस्था बनाई है। शहर के प्रमुख मार्गों से लेकर मंदिर के प्रवेश द्वारों तक निगरानी बढ़ाई गई है। चिकित्सा दलों, स्वयंसेवकों और धर्मप्रेमी संगठनों की टीमों को भी तैनात किया गया है, ताकि भक्तों को किसी प्रकार की असुविधा न हो और वे पूर्ण शांति व श्रद्धा के साथ ब्रह्मांडेश्वर महाकाल के दर्शन कर सकें।
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