बांग्लादेश में हाल ही हुए राष्ट्रीय चुनावों के अनौपचारिक नतीजों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि सत्ता परिवर्तन का समय आ चुका है। बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) ने अभूतपूर्व सफलता हासिल करते हुए सत्ता की नई दावेदारी पेश की है। ढाका-17 और बोगुरा-6 सीटों पर मिली जीत ने तारिक रहमान को चुनाव का सबसे प्रभावशाली चेहरा बना दिया है। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें बधाई देते हुए लोकतांत्रिक और प्रगतिशील बांग्लादेश के लिए भारत के समर्थन का आश्वासन भी दिया है, जो इस जीत की अंतरराष्ट्रीय महत्ता को और बढ़ाता है।
ढाका से शुरू होकर सत्ता के शीर्ष तक पहुँचती तारिक की यात्रा
तारिक रहमान की यह जीत केवल राजनीतिक सफलता नहीं, बल्कि एक लंबे संघर्ष की परिणति मानी जा रही है। 17 वर्षों तक स्वनिर्वासन में रहने के बाद 25 दिसम्बर 2025 को ढाका लौटना उनके राजनीतिक पुनर्जीवन का पहला कदम साबित हुआ। इस वापसी ने बांग्लादेश की राजनीति में नई ऊर्जा भर दी और बीएनपी समर्थकों में विश्वास की लौ फिर से प्रज्वलित कर दी। माँ बेगम खालिदा जिया के निधन के बाद उन्होंने पार्टी की जिम्मेदारी संभाली और कुछ ही महीनों में पार्टी को इतिहास की सबसे बड़ी जीत दिलाने में सफल रहे।
बहुमत से कहीं आगे निकला बीएनपी का गठबंधन
बांग्लादेश के प्रतिष्ठित अंग्रेज़ी दैनिक The Daily Star की रिपोर्ट के अनुसार, बीएनपी के नेतृत्व वाले गठबंधन ने 181 सीटों पर जीत दर्ज की है, जो बहुमत के लिए आवश्यक 151 के आंकड़े से बहुत अधिक है। इसके मुकाबले जमात-ए-इस्लामी के नेतृत्व वाले गठबंधन को 61 सीटें ही प्राप्त हो सकीं। इस्लामी आंदोलन को एक सीट और अन्य को छह सीटें मिली हैं। यह परिणाम न केवल पार्टी के लिए बल्कि बांग्लादेश की लोकतांत्रिक संरचना के लिए भी बड़े बदलाव का संकेत है, जो आने वाले वर्षों में नई नीतिगत दिशाएँ निर्धारित कर सकता है।
चुनावी रणनीति जिसने जगा दी विपक्ष में नई जान
बीएनपी ने इस चुनाव में 300 में से 292 सीटों पर उम्मीदवार उतारे, जबकि शेष सीटें सहयोगी दलों के लिए छोड़ीं। यह चुनाव रणनीति बेहद प्रभावी साबित हुई। विशेषज्ञों के अनुसार, तारिक रहमान की वापसी ने न केवल कार्यकर्ताओं में विश्वास जगाया बल्कि जनता के उन वर्गों को भी सक्रिय किया जो लंबे समय से बदलाव की प्रतीक्षा कर रहे थे। जमात-ए-इस्लामी और अन्य 11 दलों के गठबंधन से मुकाबला आसान नहीं था, फिर भी बीएनपी ने जिस तरह प्रचंड बहुमत पाया, वह तारिक की नेतृत्व क्षमता और रणनीतिक सूझ-बूझ का परिचायक है।
कौन हैं तारिक रहमान और क्यों कहा जाता है उन्हें ‘डार्क प्रिंस’
तारिक रहमान राजनीतिक विरासत से आते हैं। वह पूर्व राष्ट्रपति जनरल जियाउर रहमान और तीन बार प्रधानमंत्री रहीं बेगम खालिदा जिया के सबसे बड़े पुत्र हैं। राजनीति में उनकी भूमिका वर्षो से केंद्रीय रही है, चाहे वह बीएनपी के ढांचे को मजबूत करने की बात हो या अंतरराष्ट्रीय मंच पर पार्टी की छवि को पुनर्परिभाषित करने की। निर्वासन के वर्षों में उन पर लगे आरोपों और विवादों के कारण उन्हें ‘डार्क प्रिंस’ कहा जाने लगा, लेकिन इसी नाम के साथ उन्होंने अब विजय का नया अध्याय लिख दिया है। ढाका लौटने के बाद उन्होंने अपने समर्थकों के बीच एक ताकतवर नेतृत्व की छवि स्थापित की, जिसने अंततः उन्हें देश का अगला प्रधानमंत्री बनने की दहलीज पर ला खड़ा किया है।
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