प्रोटीन को अक्सर सिर्फ बॉडीबिल्डिंग या जिम से जोड़कर देखा जाता है, जबकि सच यह है कि यह हर उम्र, हर शरीर और हर जीवनशैली के लिए अनिवार्य पोषक तत्व है। शरीर के निर्माण से लेकर उसकी मरम्मत, हार्मोनल संतुलन से लेकर इम्यून सिस्टम की मजबूती और ऊर्जा के सुचारू प्रवाह से लेकर मेटाबॉलिज्म को स्थिर रखने तक प्रोटीन हर क्षण अपना महत्वपूर्ण योगदान देता है। इसकी कमी या अधिकता, दोनों स्वास्थ्य को प्रभावित करती हैं, इसलिए जरूरी है कि हम सही मात्रा और सही स्रोतों से इसे शामिल करें ताकि बीमारी, चोट या उम्र बढ़ने की स्थिति में भी शरीर अपनी ताकत बनाए रखे।
प्रोटीन शरीर में क्या-क्या भूमिका निभाता है
मानव शरीर का एक बड़ा भाग प्रोटीन पर आधारित है, इसलिए इसकी उपस्थिति स्वास्थ्य की नींव है। मांसपेशियों, त्वचा, बाल, नाखून, हड्डियों और आंतरिक अंगों की संरचना का मूल आधार प्रोटीन ही है। शरीर जब चोट, संक्रमण या किसी अन्य कारण से टिशू को नुकसान पहुंचाता है, तो उनकी मरम्मत प्रोटीन की उपलब्धता पर निर्भर होती है। पाचनतंत्र और मेटाबॉलिक प्रक्रियाओं में सक्रिय एंजाइम प्रोटीन से बनते हैं, जो भोजन को ऊर्जा में बदलने का काम करते हैं। हार्मोनल असंतुलन से उत्पन्न समस्याओं को नियंत्रित करने में भी इसकी अहम भूमिका होती है, क्योंकि कई महत्वपूर्ण हार्मोन प्रोटीन से ही निर्मित होते हैं।
इम्यून सिस्टम की मजबूती में प्रोटीन का योगदान
बीमारियों से लड़ने की शरीर की क्षमता में प्रोटीन का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण है। एंटीबॉडीज, जो बाहरी संक्रमणों से लड़ती हैं, प्रोटीन से ही बनती हैं। जब शरीर वायरस, बैक्टीरिया या किसी अन्य रोगजनक से लड़ता है, तो इम्यून कोशिकाओं का निर्माण और सक्रियता इसी पोषक तत्व पर निर्भर करती है। यही कारण है कि प्रोटीन की कमी वाले व्यक्ति सर्दी, खांसी, संक्रमण या घाव भरने की प्रक्रिया में धीमे हो जाते हैं। पर्याप्त प्रोटीन रोग प्रतिरोधक क्षमता को तेज करता है और रिकवरी को त्वरित बनाता है।
दैनिक जीवन में प्रोटीन की भूमिका और ऊर्जा संतुलन पर प्रभाव
प्रोटीन भोजन के पाचन को धीमा करता है, जिससे लंबे समय तक भूख नहीं लगती और पेट भरा महसूस होता है। यह स्थिर ब्लड शुगर स्तर बनाए रखने में मदद करता है, जिससे अचानक थकान, कमजोरी या भूख लगने जैसी समस्याएं कम होती हैं। वजन नियंत्रण में भी प्रोटीन सहायक है, क्योंकि यह अनावश्यक कैलोरी सेवन को कम करता है और शरीर की कैलोरी खपत को बढ़ाकर संतुलन बनाए रखता है।
क्या अधिक प्रोटीन लेना भी नुकसानदेह हो सकता है?
अधिक मात्रा में प्रोटीन लंबे समय तक लेने से कुछ दिक्कतें उत्पन्न हो सकती हैं, विशेष रूप से उन लोगों के लिए जिनकी किडनी पहले से कमजोर है। उच्च प्रोटीन सेवन शरीर में नाइट्रोजन मात्रा बढ़ा सकता है जिसके उत्सर्जन के लिए किडनी पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। साथ ही यदि पानी का सेवन कम हो तो डिहाइड्रेशन का खतरा बढ़ जाता है। अधिक प्रोटीन खाने से फाइबरयुक्त भोजन कम होता है, जिससे कब्ज, गैस और पोषक तत्वों का असंतुलन पैदा हो सकता है। इसलिए डॉक्टरों के अनुसार एक स्वस्थ वयस्क को आमतौर पर अपने वजन के प्रति किलोग्राम पर 2.2 ग्राम से अधिक प्रोटीन की आवश्यकता नहीं होती है।
आपके शरीर को कितनी प्रोटीन चाहिए और क्यों?
प्रोटीन की आवश्यकता उम्र, वजन, शारीरिक गतिविधि और स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार बदलती रहती है। संतुलित मात्रा में प्रोटीन न केवल मांसपेशियों को सुरक्षित रखता है, बल्कि उम्र बढ़ने के साथ कमजोर होती मांसपेशियों और हड्डियों की रक्षा भी करता है। किसी बीमारी, चोट या सर्जरी के बाद भी प्रोटीन तेजी से रिकवरी में मदद करता है, इसलिए इसे रोजमर्रा के आहार में विशेष स्थान दिया जाना चाहिए। सही मात्रा में प्रोटीन लेने से शरीर मजबूत, संतुलित और बीमारियों से लड़ने में अधिक सक्षम बनता है।
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