नई दिल्ली. दुनिया की सैन्य ताकत का आकलन केवल सैनिकों की संख्या से नहीं होता। युद्धक विमान, टैंक और नौसेना के संसाधन भी किसी देश की सैन्य क्षमता का अहम हिस्सा हैं। ग्लोबल फायरपावर 2026 के आंकड़ों के मुताबिक भारत सक्रिय सैन्य कर्मियों की संख्या में दूसरे, टैंकों में पांचवें, सैन्य विमानों की संख्या में चौथे और नौसैनिक संसाधनों में चौथे स्थान पर है। इससे स्पष्ट होता है कि भारत चारों प्रमुख श्रेणियों में शीर्ष देशों में शामिल है। अमेरिका सैन्य विमानों की संख्या में सबसे आगे है जबकि चीन के पास सबसे अधिक नौसैनिक संसाधन हैं। ये आंकड़े सैन्य शक्ति के व्यापक स्वरूप को दर्शाते हैं।
सक्रिय सैन्य कर्मियों में भारत का दूसरा स्थान
सक्रिय सैन्य कर्मियों की संख्या के मामले में चीन लगभग 20.4 लाख कर्मियों के साथ पहले स्थान पर है। भारत करीब 14.31 लाख सक्रिय सैन्य कर्मियों के साथ दूसरे स्थान पर काबिज है। अमेरिका लगभग 13.3 लाख कर्मियों के साथ तीसरे और उत्तर कोरिया करीब 13.2 लाख कर्मियों के साथ चौथे स्थान पर है। रूस लगभग 13.2 लाख सैन्य कर्मियों के साथ पांचवें स्थान पर है। यूक्रेन करीब नौ लाख, पाकिस्तान 6.60 लाख, ईरान 6.10 लाख, इथियोपिया लगभग 5.03 लाख और तुर्किये 4.81 लाख कर्मियों के साथ आगे के स्थानों पर हैं। इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि सक्रिय सैन्य कर्मियों की संख्या के लिहाज से भारत दुनिया की सबसे बड़ी सैन्य शक्तियों में शामिल है।
टैंकों की संख्या में भारत की रैंकिंग
थल सेना की क्षमता का आकलन करने में युद्धक टैंकों की संख्या भी एक महत्वपूर्ण पैमाना है। ग्लोबल फायरपावर के आंकड़ों के अनुसार चीन 5,750 टैंकों के साथ पहले और रूस 5,630 टैंकों के साथ दूसरे स्थान पर है। उत्तर कोरिया 4,895 टैंकों के साथ तीसरे स्थान पर है जबकि अमेरिका 4,666 टैंकों के साथ चौथे स्थान पर है। भारत के पास 3,913 टैंक बताए गए हैं जिसके आधार पर वह पांचवें स्थान पर है। हालांकि केवल टैंकों की संख्या से उनकी वास्तविक युद्धक क्षमता का पूरा पता नहीं चलता। टैंकों की तकनीक, सुरक्षा प्रणाली, मारक क्षमता और रखरखाव भी महत्वपूर्ण होते हैं।
सैन्य विमानों और नौसैनिक संसाधनों में स्थिति
सैन्य विमानों की संख्या में भारत चौथे स्थान पर है जबकि अमेरिका इस श्रेणी में सबसे आगे है। नौसैनिक संसाधनों के मामले में भी भारत चौथे स्थान पर काबिज है और चीन इस क्षेत्र में सबसे अधिक संसाधनों के साथ शीर्ष पर है। ये आंकड़े दर्शाते हैं कि भारत थल, वायु और जल तीनों क्षेत्रों में मजबूत उपस्थिति रखता है। विभिन्न श्रेणियों में शीर्ष दस में शामिल होना भारत की संतुलित सैन्य क्षमता को रेखांकित करता है। फिर भी इन संसाधनों का प्रभावी उपयोग प्रशिक्षण, रखरखाव और रणनीतिक योजना पर निर्भर करता है। संख्या के साथ गुणवत्ता भी उतनी ही जरूरी है।
केवल संख्या से नहीं आंकी जाती वास्तविक सैन्य क्षमता
ग्लोबल फायरपावर के ये आंकड़े सैन्य शक्ति का एक पक्ष तो दिखाते हैं लेकिन किसी देश की वास्तविक युद्ध क्षमता का पूरा आकलन इनसे नहीं किया जा सकता। आधुनिक युद्ध में केवल सैनिकों, टैंकों या विमानों की संख्या पर्याप्त नहीं होती। तकनीक, खुफिया क्षमता, रसद व्यवस्था, कमान और नियंत्रण प्रणाली तथा युद्ध के मैदान में तेजी से निर्णय लेने की क्षमता भी निर्णायक भूमिका निभाती है। ड्रोन और सटीक निशाना लगाने वाले हथियारों के बढ़ते इस्तेमाल ने पारंपरिक प्लेटफॉर्म्स की सुरक्षा को लेकर नई चुनौतियां पैदा की हैं। इसलिए संख्या के साथ आधुनिकीकरण भी आवश्यक है।
आधुनिक युद्ध में तकनीक और रणनीति का महत्व
आज के युद्ध परिदृश्य में टैंकों और विमानों की संख्या से ज्यादा उनकी तकनीकी क्षमता और युद्ध रणनीति मायने रखती है। आधुनिक सेंसर, इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर, नेटवर्क सेंट्रिक ऑपरेशंस और सटीक हथियार प्रणालियां युद्ध के परिणाम तय करती हैं। भारत लगातार अपने सैन्य उपकरणों के आधुनिकीकरण पर जोर दे रहा है। ग्लोबल फायरपावर के आंकड़े भारत की मजबूत स्थिति को तो दिखाते हैं लेकिन वास्तविक शक्ति का आकलन प्रशिक्षण, संयुक्त अभ्यास और वास्तविक युद्ध परिस्थितियों में प्रदर्शन से ही संभव है। इसलिए संख्या के साथ गुणवत्ता और रणनीतिक तैयारियों पर भी समान ध्यान देना जरूरी है।