नई दिल्ली. वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल ए.पी. सिंह ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पश्चिमी मोर्चे पर किए गए नपे-तुले और सटीक हमलों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि अब कोई भी लक्ष्य भारतीय वायुसेना की पहुंच से बाहर नहीं रहा। उन्होंने बताया कि यह सैन्य अभियान लगभग 1200 किलोमीटर की चौड़ाई और 200 किलोमीटर की गहराई तक फैला हुआ था। भारतीय जांबाजों ने दुश्मन के ठिकानों पर बेहद सटीक और मारक प्रहार किए। इस कार्रवाई ने देश के प्राथमिक जवाबी रक्षक और एक मजबूत रणनीतिक निवारक के रूप में वायु शक्ति की निर्णायक भूमिका को पूरी दुनिया के सामने एक बार फिर साबित कर दिया। उन्होंने इसे आतंकवाद-रोधी कार्रवाई में वायुसेना की क्षमता-केंद्रित रणनीति की उल्लेखनीय सफलता बताया।
क्षमता-केंद्रित रणनीति से मिली रणनीतिक सफलता
चार दिनों तक चले इस अभियान की अगुवाई करने वाले एयर चीफ मार्शल ने आगाह किया कि सफलता के बाद लापरवाही नहीं बरतनी चाहिए। उन्होंने कहा कि सेना को अपनी क्षमताओं को लगातार मजबूत करते रहना होगा। इस ऑपरेशन से सबसे बड़ा सबक यह मिला कि हमेशा कई विकल्प खुले रखने चाहिए और दुश्मन के दांव-पेंच बदलते ही तेजी से रणनीति में बदलाव करने में सक्षम होना चाहिए। एक क्षमता-केंद्रित सेना ही ऐसा कर सकती है क्योंकि वह किसी एक हथियार पर निर्भर न रहकर कई विकल्पों का उपयोग कर सकती है। इसी लचीलेपन की बदौलत वायुसेना तनाव को अपने नियंत्रण में रखते हुए कार्रवाई करने में सफल रही।
पहलगाम आतंकी हमले का करारा जवाब
पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में पिछले साल मई में ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया गया था। इसके तहत पाकिस्तान और उसके कब्जे वाले इलाकों में आतंकी ठिकानों पर सटीक हमले किए गए। यह 1971 के बांग्लादेश मुक्ति संग्राम के बाद सीमा पार भारत की सबसे साहसिक सैन्य कार्रवाई मानी जाती है। इस दौरान भारत ने 9 प्रमुख आतंकी अड्डों को निशाना बनाया। पाकिस्तान द्वारा आतंकी संगठनों को पनाह देना जारी रखने पर वायुसेना ने उसके सैन्य ठिकानों पर भी प्रहार किया जो रावलपिंडी जैसे सैन्य मुख्यालय के बेहद करीब तक पहुंचे। यह कार्रवाई आतंकवाद के खिलाफ भारत की दृढ़ इच्छाशक्ति का प्रतीक बनी।
स्वदेशी हथियारों और संयुक्त तालमेल का दमदार प्रदर्शन
वायुसेना प्रमुख ने बताया कि भारत में विकसित कुछ हथियार प्रणालियों ने असाधारण प्रदर्शन करते हुए दुश्मन के इलाके में गहराई तक गंभीर चोट पहुंचाई। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस अभियान की सफलता किसी एक हथियार या लड़ाकू विमान की वजह से नहीं मिली। बल्कि सटीक खुफिया जानकारी, नेटवर्क ऑपरेशंस, इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर, सटीक मारक क्षमता वाले हथियारों और मजबूत एयर डिफेंस के संयुक्त तालमेल से हासिल हुई। स्वदेशी नेटवर्क आधारित एयर डिफेंस सिस्टम ने पाकिस्तानी सेना की ओर से दागे गए कई ड्रोनों और लंबी दूरी के हथियारों को हवा में ही नाकाम कर दिया। यह प्रदर्शन आत्मनिर्भर भारत की सैन्य क्षमता का मजबूत प्रमाण बना।
नागरिक सुरक्षा और शून्य कोलैटरल डैमेज का संकल्प
भारतीय वायुसेना ने पूरे अभियान के दौरान आम नागरिकों की सुरक्षा और शून्य कोलैटरल डैमेज के अपने संकल्प का पूरी तरह पालन किया। वायुसेना प्रमुख ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि सटीक निशानेबाजी के बावजूद नागरिक क्षेत्रों को नुकसान पहुंचाने से पूरी तरह बचा गया। यह दृष्टिकोण न केवल सैन्य अनुशासन को दर्शाता है बल्कि अंतरराष्ट्रीय मानकों के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को भी रेखांकित करता है। सटीक खुफिया और तकनीकी तालमेल की बदौलत ही इतने बड़े अभियान में नागरिक नुकसान को न्यूनतम रखा जा सका। यह सफलता भविष्य के अभियानों के लिए भी एक मजबूत उदाहरण प्रस्तुत करती है।
विकसित भारत 2047 के विजन के साथ भविष्य की तैयारी
वायुसेना प्रमुख ने कहा कि भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए वायुसेना निगरानी और टोही, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध, एंटी-ड्रोन सिस्टम, सुरक्षित नेटवर्क तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित प्रणालियों पर विशेष ध्यान केंद्रित कर रही है। वायुसेना का लक्ष्य विकसित भारत 2047 के राष्ट्रीय विजन के साथ पूरी तरह जुड़ा हुआ है। इसके तहत भारतीय वायुसेना एक ऐसी मल्टी-डोमेन एयरोस्पेस शक्ति बनेगी जो आत्मनिर्भर, तकनीकी रूप से उन्नत और देश के आर्थिक व सामरिक हितों की रक्षा करने में पूरी तरह सक्षम हो। यह विजन न केवल वर्तमान क्षमताओं को मजबूत करेगा बल्कि आने वाले दशकों की सुरक्षा चुनौतियों का प्रभावी जवाब भी सुनिश्चित करेगा।