प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा अरुणाचल प्रदेश के स्थापना दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री पेमा खांडू को भेजा गया पत्र न केवल शुभकामनाओं से भरा संदेश है, बल्कि यह उस प्रदेश की आत्मा, संस्कृति और विकास की प्रतिबद्धता को भी उजागर करता है जिसे सूर्य सबसे पहले स्पर्श करता है। मोदी ने इसे उचित बताया कि जो भूमि देश में सबसे पहले सूर्योदय का स्वागत करती है, वही असीम देशभक्ति, उत्साह और जीवंतता से भी परिपूर्ण है।
अरुणाचल की विशिष्ट पहचान और ‘जय हिंद’ की परंपरा
प्रधानमंत्री ने अपने पत्र में विशेष रूप से उस सांस्कृतिक विशेषता का उल्लेख किया जिसमें लोग एक-दूसरे को ‘जय हिंद’ कहकर अभिवादन करते हैं। उनके शब्दों में यह केवल एक अभिवादन नहीं, बल्कि राष्ट्रीय एकता और गौरव की जीवंत अभिव्यक्ति है। उन्होंने कहा कि अरुणाचल प्रदेश विविध जनजातीय समुदायों का घर है और प्रत्येक समुदाय की अनूठी परंपराएं, मूल्य और जीवनशैली भारतीय संस्कृति की विशालता को और समृद्ध बनाती हैं।
लोगों के स्नेह, प्रयास और सतत विकास का संकल्प
मोदी ने कहा कि इस राज्य की उनके लिए सबसे प्रेरणादायक बात यहां के लोगों का सतत विकास के प्रति जुनून है। चाहे सामुदायिक प्रयास हों या व्यक्तिगत पहल, हर कदम में उत्साह और समर्पण दिखाई देता है। प्रधानमंत्री ने याद किया कि उनकी अरुणाचल यात्राओं के दौरान उन्हें जो स्नेह और अपनापन मिला, वह अविस्मरणीय है। उन्होंने यह भी बताया कि जब जीएसटी ‘बचत उत्सव’ की शुरुआत ईटानगर से हुई थी, तब उन्हें स्वयं सहायता समूहों और व्यापारियों के साथ बातचीत का अवसर मिला और उनके नवाचार की भावना ने उन्हें गहराई से प्रभावित किया।
केंद्र सरकार के प्रयास और कनेक्टिविटी में ऐतिहासिक सुधार
प्रधानमंत्री ने पत्र में लिखा कि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन सरकार ने पूरे पूर्वोत्तर के विकास के लिए अब तक का सर्वाधिक संसाधन समर्पित किया है। उन्होंने याद दिलाया कि अरुणाचल के गौरव किरेन रीजीजू को राज्य से पहला केंद्रीय कैबिनेट मंत्री बनने का गौरव मिला। पिछले एक दशक में अरुणाचल में मंत्रियों के दौरों ने भी यह संदेश दिया कि केंद्र सरकार पूर्वोत्तर को नया महत्व दे रही है।
मोदी ने स्वीकार किया कि अरुणाचल की सबसे बड़ी चुनौती हमेशा से कनेक्टिविटी रही है। उन्होंने बताया कि सरकार ने इस दिशा में दिन-रात काम करते हुए हजारों किलोमीटर सड़कें बनाई हैं, जिनमें कई अत्यंत दुर्गम क्षेत्रों में हैं। डोनी पोलो एयरपोर्ट और सेला सुरंग जैसी परियोजनाओं को समय पर पूरा करना इस प्रतिबद्धता का प्रमाण है।
सीमावर्ती गांवों की सोच को बदलने वाला ‘जीवंत ग्राम कार्यक्रम’
प्रधानमंत्री ने उन गांवों का भी उल्लेख किया जो सीमावर्ती क्षेत्रों में स्थित हैं और जिन्हें पारंपरिक सोच में “अंतिम गांव” कहा जाता था। उन्होंने कहा कि वे इस सोच से सहमत नहीं थे क्योंकि उनके लिए सीमावर्ती गांव “भारत के पहले गांव” हैं। इसी विचार से ‘जीवंत ग्राम कार्यक्रम’ शुरू किया गया और इसका लाभ अरुणाचल के अनेक गांवों को मिला है।
पांडुलिपियों के संरक्षण का अनमोल प्रयास
मोदी ने ‘ज्ञान भारतम मिशन’ के तहत तवांग, पश्चिम कामेंग, शि-योमी, नामसाई और ऊपरी सियांग जिले में दुर्लभ पांडुलिपियों के डिजिटलीकरण और दस्तावेजीकरण के लिए किए जा रहे कार्यों की भी सराहना की। उनके अनुसार यह न केवल सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण है, बल्कि भावी पीढ़ियों के लिए ज्ञान का अमूल्य खजाना भी है।
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