कांग्रेस की वरिष्ठ नेता प्रियंका गांधी वाद्रा ने गुवाहाटी में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान असम की भाजपा सरकार के खिलाफ 20-सूत्री ‘आरोपपत्र’ जारी किया, जिसमें भ्रष्टाचार, अल्पसंख्यकों में भय, वादों की असफलता और सत्ता के दुरुपयोग जैसे गंभीर मुद्दों को रेखांकित किया गया। विधानसभा चुनावों से पहले यह कदम राज्य की राजनीति को नए मोड़ पर ले जाता दिख रहा है।
भाजपा शासन पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप
आरोपपत्र में कांग्रेस ने दावा किया कि पिछले एक दशक में राज्य सरकार में ‘व्यापक भ्रष्टाचार’ पनपा है। आरोप लगाया गया कि मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा, उनके करीबी मंत्रियों और उनके परिजनों ने सत्ता का दुरुपयोग कर अवैध रूप से संपत्ति इकट्ठी की है। कांग्रेस का कहना है कि प्रशासनिक मशीनरी को पारदर्शिता और जवाबदेही से दूर रखते हुए सत्ता के एकछत्र लाभ के लिए इस्तेमाल किया गया।
अल्पसंख्यक समुदायों में भय का आरोप
प्रियंका गांधी वाद्रा ने यह भी आरोप लगाया कि भाजपा सरकार ने सरकारी संस्थाओं का उपयोग अल्पसंख्यक समुदायों में भय और असुरक्षा पैदा करने के लिए किया। कांग्रेस ने दावा किया कि राज्य में कानून-व्यवस्था के नाम पर समुदाय विशेष के प्रति पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाया गया है, जिससे सामाजिक सौहार्द प्रभावित हुआ है।
अधूरे वादों का सवाल
कांग्रेस के आरोपपत्र का एक महत्वपूर्ण बिंदु यह था कि भाजपा सरकार छह प्रमुख आदिवासी समुदायों को अनुसूचित जनजाति का दर्जा दिलवाने के अपने चुनावी वादे को पूरा नहीं कर सकी। पार्टी ने कहा कि आदिवासी समाज को वर्षों से प्रतीक्षा में रखा गया, जबकि उनके हितों को सदा चुनावी मुद्दों तक सीमित रखा गया। इसी तरह चाय बागान मजदूरों की दैनिक मजदूरी को 351 रुपये तक बढ़ाने का वादा भी पूरा नहीं हुआ।
चुनावी तैयारियों के बीच आरोप पत्र का महत्व
असम विधानसभा चुनाव नजदीक आने के साथ ही कांग्रेस का यह कदम भाजपा के लिए चुनौती खड़ी करता दिखता है। प्रियंका गांधी के दो दिवसीय असम दौरे को कांग्रेस की चुनावी रणनीति का अहम हिस्सा माना जा रहा है। उनकी मौजूदगी ने पार्टी कार्यकर्ताओं में ऊर्जा भरी है और भाजपा के खिलाफ माहौल बनाने की कोशिश को गति दी है।
राजनीतिक तापमान में तेज इजाफा
आरोपपत्र जारी होने के साथ ही राज्य का राजनीतिक तापमान और बढ़ गया है। भाजपा इन आरोपों को खारिज कर सकती है, लेकिन आरोपपत्र का असर आगामी चुनावी विमर्श पर व्यापक रूप से देखने को मिलेगा। चुनावी मौसम में यह दस्तावेज भाजपा के लिए एक नई चुनौती और विपक्ष के लिए एक प्रमुख हथियार बन चुका है।
Comments (0)