नई दिल्ली: दशहरा और विजयादशमी के पर्व पर इस बार तिथि को लेकर लोगों के मन में असमंजस है। 20 अक्टूबर 2026, मंगलवार को सुबह नवमी तिथि रहेगी, जबकि दोपहर में दशमी तिथि शुरू होगी। ऐसे में नवरात्रि का हवन, व्रत पारण और दशहरे की पूजा अलग-अलग समय पर की जाएगी। पंचांग के अनुसार, नई दिल्ली-NCR में नवमी तिथि दोपहर 12:50 बजे तक है। इसके बाद दशमी तिथि शुरू हो जाएगी। ऐसे में पूजा करते समय तिथि और शुभ मुहूर्त का ध्यान रखना जरूरी है।
दशहरा आज है, फिर सुबह नवमी क्यों?
दशहरे के दिन सुबह नवमी तिथि होने के बावजूद विजयादशमी का पर्व 20 अक्टूबर को ही मनाया जाएगा। इसकी वजह यह है कि विजयादशमी के निर्धारण में अपराह्न काल में दशमी तिथि की उपस्थिति महत्वपूर्ण मानी जाती है।नई दिल्ली-NCR के पंचांग के अनुसार, 20 अक्टूबर को दोपहर 12:50 बजे दशमी तिथि शुरू होगी। इसके बाद अपराह्न काल में दशमी तिथि रहने के कारण इसी दिन विजयादशमी मनाई जाएगी। इस दौरान श्रवण नक्षत्र भी शाम तक रहेगा।
दशमी तिथि 21 अक्टूबर को दोपहर 2:11 बजे तक रहेगी। हालांकि, अगले दिन तक दशमी तिथि रहने का मतलब यह नहीं है कि दशहरा भी अगले दिन मनाया जाएगा। पर्व की तारीख तय करने में संबंधित पूजा काल और पंचांग के नियमों का महत्व होता है।
नवमी का हवन कब करें?
जिन परिवारों में महानवमी का हवन बाकी है, वे 20 अक्टूबर को सुबह नवमी तिथि के दौरान हवन कर सकते हैं।
हवन का समय: सुबह 6:25 बजे से दोपहर 12:50 बजे तक।
नवमी तिथि समाप्त: दोपहर 12:50 बजे।
दशमी तिथि प्रारंभ: दोपहर 12:50 बजे के बाद।
जिन लोगों का हवन किसी कारणवश पहले नहीं हो पाया, वे नवमी तिथि के भीतर पूजा और हवन पूरा कर सकते हैं।
नवरात्रि व्रत का पारण कब करें?
नौ दिनों तक नवरात्रि का व्रत रखने वाले श्रद्धालुओं के लिए पारण का समय भी महत्वपूर्ण है। दी गई पंचांग जानकारी के अनुसार, नवमी तिथि समाप्त होने के बाद यानी दोपहर 12:50 बजे के बाद व्रत का पारण किया जा सकता है।व्रत रखने वाले श्रद्धालु पहले अपनी नवमी की पूजा और हवन पूरा करें, फिर निर्धारित समय के अनुसार पारण करें।
दशहरे की पूजा का विजय मुहूर्त क्या है?
अपराह्न पूजा का समय: दोपहर 1:14 बजे से 3:30 बजे तक।
विजय मुहूर्त: दोपहर 1:59 बजे से 2:45 बजे तक।
राहुकाल की शुरुआत: दोपहर 2:56 बजे।
विजय मुहूर्त दशहरे की पूजा के लिए विशेष माना जाता है। दिए गए समय के अनुसार, विजय मुहूर्त राहुकाल शुरू होने से पहले समाप्त हो जाएगा। इसलिए श्रद्धालु अपनी पूजा की तैयारी उसी हिसाब से कर सकते हैं।
नवमी और दशमी की पूजा में रखें इन बातों का ध्यान
20 अक्टूबर को तिथि बदलने के कारण पूजा की योजना बनाते समय कुछ बातें ध्यान में रखना जरूरी है। नवमी का हवन नवमी तिथि के दौरान पूरा करें। ध्यान रहे कि बताए गए सभी समय नई दिल्ली-NCR के लिए हैं। दूसरे शहरों में सूर्योदय, स्थानीय पंचांग और मुहूर्त के अनुसार समय में अंतर हो सकता है।