महाशिवरात्रि को भगवान शिव और माता पार्वती के दिव्य विवाह का प्रतीक माना जाता है। यह रात साधना, उपासना, आत्मचिंतन और मोक्ष की ओर अग्रसर होने का सर्वोत्तम अवसर मानी जाती है। भक्त उपवास रखते हैं, रात्रि जागरण करते हैं और शिवलिंग का पंचामृत व विविध द्रव्यों से अभिषेक करते हुए शिवानंद की अनुभूति प्राप्त करते हैं।
300 वर्ष बाद बना अद्भुत ग्रह संयोग
ज्योतिषीय अभिलेख बताते हैं कि वर्ष 2026 की महाशिवरात्रि पर सूर्य, बुध और शुक्र की युति से विशेष त्रिग्रही योग बन रहा है। इसके साथ ही श्रवण नक्षत्र, व्यतिपात योग, वरियान योग, ध्रुव योग और राजयोग जैसी शुभ स्थितियाँ एक साथ उपस्थित होंगी। ज्योतिष मान्यता है कि ऐसे संयोगों में की गई साधना, मंत्र-जप और ध्यान अत्यंत प्रभावकारी होते हैं तथा साधक को शीघ्र फलप्राप्ति का अवसर मिलता है।
महाशिवरात्रि की पूजा में चार प्रहरों का महत्व
इस रात्रि को चार प्रहरों में बांटा गया है और प्रत्येक प्रहर की अपनी विशिष्टता मानी जाती है। प्रथम प्रहर की पूजा मन की शुद्धि, द्वितीय प्रहर की पूजा रोग-निवारण, तृतीय प्रहर की उपासना मोक्ष-मार्ग की प्राप्ति तथा चतुर्थ प्रहर का अभिषेक शिव-कृपा के स्थायी स्वरूप की प्राप्ति का कारक माना जाता है। हर प्रहर में ‘ॐ नमः शिवाय’ का जाप, बिल्वपत्र अर्पण और शिव-ध्यान अत्यंत फलदायी माना गया है।
निशीथ काल: महाशिवरात्रि की सबसे शक्तिशाली घड़ी
कई पंचांगों के अनुसार निशीथ काल को इस रात्रि का सर्वोपरि क्षण माना गया है। यह वह समय है जब ब्रह्मांडीय ऊर्जा सर्वाधिक सक्रिय होती है और शिवोपासना का फल कई गुना बढ़ जाता है। 15 फरवरी 2026 की महाशिवरात्रि पर यह अत्यंत दुर्लभ शुभ काल केवल 51 मिनट का होगा, जिसका आध्यात्मिक महत्व अनुपम है।
महाशिवरात्रि 2026 के विशेष मुहूर्त
चतुर्दशी तिथि 15 फरवरी को सायं 5:04 बजे आरंभ होगी और 16 फरवरी को सायं 5:34 बजे समाप्त होगी। इसी अवधि में निशीथ काल 15 फरवरी की मध्यरात्रि 12:09 बजे से 1:01 बजे तक रहेगा, जिसमें शिवाभिषेक और मंत्र-जप करने का विशेष महत्व है। माना जाता है कि इस समय की गई साधना जीवन के सभी क्षेत्रों में स्थायी कल्याण और आध्यात्मिक उन्नति प्रदान करती है।
साल 2026 की महाशिवरात्रि केवल एक धार्मिक पर्व नहीं बल्कि ब्रह्मांडीय शक्तियों का दुर्लभ संगम है। भक्त जितनी श्रद्धा और एकाग्रता से इस पावन रात्रि में सच्चे मन से शिव की आराधना करेंगे, उतनी ही शीघ्र शिव-कृपा और कल्याण की अनुभूति उन्हें प्राप्त होगी। यह अवसर सौभाग्य का प्रहरी है, जिसे पूर्ण समर्पण के साथ जीना चाहिए।
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