रसायनज्ञ मानव हाथों को काइरल कहते हैं क्योंकि बायां हाथ दाएं हाथ का पूर्ण दर्पण प्रतिबिंब होने के बावजूद किसी भी घुमाव से एक को दूसरे में नहीं बदला जा सकता। जीवन के लिए आवश्यक कई अणु भी इसी गुण को साझा करते हैं और सैद्धांतिक रूप से ब्रह्मांड में समान मात्रा में दो रूपों में मौजूद हो सकते हैं। फिर भी जीव विज्ञान अत्यंत चयनशील है। जीवित जीवों में अमीनो अम्ल आमतौर पर बाएं हाथ के होते हैं जबकि शर्करा दाएं हाथ की होती हैं। यह असममितता जीवन की उत्पत्ति से जुड़ी सबसे बड़ी पहेलियों में से एक मानी जाती है। वैज्ञानिक लंबे समय से यह समझने का प्रयास कर रहे हैं कि प्रकृति ने एक रूप को दूसरे पर प्राथमिकता क्यों दी। इस प्रश्न का उत्तर खोजने की दिशा में इस वर्ष के नोबेल विजेताओं का योगदान महत्वपूर्ण है।
नोबेल पुरस्कार विजेता और उनकी उपलब्धि
इस वर्ष का नोबेल रसायन विज्ञान पुरस्कार यूनिवर्सिटी ऑफ पेरिस-सैकले के हेनरी कागन और टोक्यो यूनिवर्सिटी ऑफ साइंस के सोई केंसो को दिया गया है। पुरस्कार समिति के एक सदस्य ने बुधवार को समझाया कि डॉ. सोई द्वारा खोजी गई वह प्रतिक्रिया जो स्वयंस्फूर्त रूप से असममित उत्पाद उत्पन्न करती है जीवन के उद्भव के चार अरब वर्ष बाद पृथ्वी पर हुई एक अद्वितीय नवाचार है। दोनों वैज्ञानिकों के कार्य ने यह समझने में मदद की कि बड़े पैमाने पर आणविक असममितता कैसे उत्पन्न हो सकती है। उनकी खोजें रसायन विज्ञान की उन सीमाओं को पार करती हैं जिन्हें पहले असंभव माना जाता था। यह उपलब्धि न केवल सैद्धांतिक महत्व रखती है बल्कि भविष्य की कई अनुप्रयोग संभावनाओं को भी खोलती है।
पारंपरिक तरीकों की सीमाएं
रसायनज्ञ पहले भी किसी विशेष काइरलिटी के अणुओं को चुनिंदा रूप से उत्पन्न कर सकते थे। हालांकि ऐसी सभी प्रतिक्रियाएं एक काइरल उत्प्रेरक पर निर्भर करती थीं जो अक्सर बाएं और दाएं हाथ के अणुओं के असमान मिश्रण से बना होता था। काम करने वाली धारणा यह थी कि प्रतिक्रिया के उत्पादों में बाएं से दाएं हाथ के अणुओं का अनुपात उत्प्रेरक में मौजूद अनुपात से मेल खाएगा। इससे एक बड़ी समस्या उत्पन्न होती थी। यदि प्रतिक्रिया केवल उत्प्रेरक की असममितता से मेल खा सकती है तो कार्बनिक अणुओं में देखी जाने वाली बड़े पैमाने की असममितता कैसे उत्पन्न हुई? यह प्रश्न लंबे समय तक अनुत्तरित रहा। वैज्ञानिक इस चक्रव्यूह से बाहर निकलने का मार्ग खोज रहे थे।
सोई केंसो की स्वयंस्फूर्त असममित प्रतिक्रिया
सोई केंसो की खोज ने इस समस्या का समाधान प्रस्तुत किया। उन्होंने ऐसी प्रतिक्रिया खोजी जो बिना किसी पूर्व असममित उत्प्रेरक के स्वयं असममित उत्पाद उत्पन्न कर सकती है। यह खोज इसलिए क्रांतिकारी मानी गई क्योंकि इससे पहले माना जाता था कि असममितता केवल असममित उत्प्रेरक से ही स्थानांतरित हो सकती है। उनकी प्रतिक्रिया ने दिखाया कि कुछ परिस्थितियों में अणु स्वयं ही एक दिशा में झुक सकते हैं और बड़ी मात्रा में एक ही काइरल रूप उत्पन्न कर सकते हैं। यह प्रक्रिया जीवन की उत्पत्ति के समय हुई संभावित रासायनिक घटनाओं से मेल खाती है। वैज्ञानिक समुदाय में इसे चार अरब वर्ष बाद पृथ्वी पर हुई सबसे महत्वपूर्ण आणविक नवाचारों में से एक माना जा रहा है।
हेनरी कागन का योगदान और संयुक्त महत्व
हेनरी कागन ने भी काइरल रसायन विज्ञान के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनके कार्य ने असममित उत्प्रेरण की समझ को गहराया और नई प्रतिक्रियाओं के विकास का मार्ग प्रशस्त किया। दोनों वैज्ञानिकों की खोजों ने मिलकर यह स्पष्ट किया कि आणविक असममितता का उद्भव उतना रहस्यमय नहीं जितना पहले माना जाता था। उनकी उपलब्धियों ने रसायन विज्ञान को नई दिशा दी है जहां स्वयंस्फूर्त असममितता को प्रयोगशाला में दोहराया जा सकता है। यह ज्ञान भविष्य में दवा निर्माण और अन्य क्षेत्रों में भी उपयोगी सिद्ध हो सकता है। नोबेल समिति ने दोनों के संयुक्त योगदान को जीवन की मूलभूत पहेली सुलझाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।
जीवन की उत्पत्ति और भविष्य की संभावनाएं
जीवन में पाई जाने वाली आणविक असममितता की पहेली अब कुछ हद तक सुलझने लगी है। वैज्ञानिक मानते हैं कि प्रारंभिक पृथ्वी पर हुई रासायनिक प्रतिक्रियाओं में इसी प्रकार की स्वयंस्फूर्त प्रक्रियाएं हुई होंगी जिन्होंने एक रूप को प्राथमिकता दी। कागन और सोई के कार्य ने इस संभावना को प्रयोगशाला में सिद्ध कर दिया है। भविष्य में इन खोजों का उपयोग नई दवाओं के विकास अधिक कुशल उत्प्रेरकों के निर्माण और कृत्रिम जीवन प्रणालियों के अध्ययन में किया जा सकता है। नोबेल पुरस्कार ने न केवल इन वैज्ञानिकों के योगदान को सम्मानित किया है बल्कि पूरे वैज्ञानिक समुदाय को इस दिशा में और गहन अनुसंधान के लिए प्रेरित भी किया है। कुल मिलाकर यह उपलब्धि रसायन विज्ञान और जीव विज्ञान के बीच सेतु का कार्य करेगी।