फाल्गुन मास की शिवरात्रि के अवसर पर जब देशभर में शिवभक्त कांवड़ यात्रा में शामिल हो रहे थे, उसी दौरान संभल निवासी तमन्ना ने हरिद्वार से अपनी कांवड़ यात्रा शुरू की। अपने ससुराल पक्ष के साथ यात्रा करते हुए तमन्ना ने बताया कि उन्होंने हाल ही में अमन त्यागी से विवाह किया है और सनातन परंपरा के प्रति सम्मान और आस्था के भाव से यह यात्रा करने का निर्णय लिया। तमन्ना की यह यात्रा धार्मिक समन्वय और पारिवारिक संस्कारों की अनूठी झलक थी, जिसने अनेक लोगों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित कर लिया।
नूरपुर पहुंचने पर उमड़ी भीड़, बना आकर्षण का केंद्र
शुक्रवार को जब तमन्ना कांवड़ियों के जत्थे के साथ नूरपुर क्षेत्र में पहुंचीं, तो उन्हें देखने के लिए लोगों की बड़ी भीड़ जमा हो गई। स्थानीय नागरिकों के लिए यह दृश्य उतना ही अनोखा था जितना प्रेरणादायक। कांवड़ियों ने बताया कि तमन्ना बिना किसी संकोच के श्रद्धा और ऊर्जा के साथ यात्रा के प्रत्येक पड़ाव को पूरा कर रही हैं। उनकी आस्था ने शिवभक्तों के बीच विशेष सम्मान और जिज्ञासा पैदा की, जिससे यात्रा का माहौल और भी उत्साहपूर्ण हो गया।
संवेदनशीलता के बीच सुरक्षा व्यवस्था भी रही कड़ी
इस अनोखी यात्रा के साथ जुड़े सामाजिक पहलुओं को देखते हुए स्थानीय पुलिस प्रशासन सतर्क रहा। विश्व हिंदू परिषद के नगर अध्यक्ष गौरव त्यागी और भारतीय जनता पार्टी के नगर उपाध्यक्ष जीतू भुइयार के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने तमन्ना और उनके जत्थे को सुरक्षा घेराबंदी के साथ बलदाना गांव के पास बॉर्डर से शिवाला कला सीमा तक सुरक्षित पहुंचाया। यह एहतियाती कदम इसलिए आवश्यक था ताकि भीड़ और उत्साह के बीच किसी प्रकार की अप्रिय परिस्थिति न उत्पन्न हो।
स्थानीय नागरिकों ने किया पुष्पवर्षा और स्वागत
तमन्ना की यात्रा न केवल चर्चा का विषय बनी बल्कि लोगों के लिए प्रेरणा का कारण भी रही। रास्ते में कई स्थानों पर श्रद्धालुओं और स्थानीय नागरिकों ने उन पर फूल बरसाकर, मालाएं पहनाकर उनका स्वागत किया। गांवों के लोग इस दृश्य को अपनी आंखों से देखने के लिए उमड़ पड़े। आस्था, सम्मान और सामुदायिक सद्भाव की यह अनूठी झलक क्षेत्र में लंबे समय तक याद रखी जाएगी।
सामाजिक सौहार्द का संदेश देती यह यात्रा
तमन्ना की कांवड़ यात्रा सिर्फ एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि सामाजिक सौहार्द, आस्था और मानव मूल्यों के संगम की प्रतीक बन गई। महाशिवरात्रि पर बुर्के में कांवड़ उठाए चल रही एक मुस्लिम महिला ने यह संदेश दिया कि पूजा, भक्ति और श्रद्धा किसी एक समुदाय की सीमाओं में बंधी नहीं होती। यह यात्रा सामूहिक सह-अस्तित्व, सामाजिक एकता और आपसी सम्मान का जीवंत उदाहरण बनकर उभरी।
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