गिद्ध संरक्षण को नई दिशा देते हुए दक्षिण पन्ना वनमण्डल ने “गिद्ध अनुकूल गौशाला” प्रमाणन पहल की शुरुआत की है। इस अभिनव पहल के तहत पवई स्थित श्री विद्यासागर गौशाला क्षेत्र की पहली स्व-प्रमाणित गिद्ध अनुकूल गौशाला बनी है, जहाँ गिद्धों के लिए सुरक्षित पशु-चिकित्सा एवं प्रबंधन पद्धतियों को अपनाया गया है।
गिद्ध संरक्षण हेतु सुरक्षित दवाओं के उपयोग पर जोर
स्व-प्रमाणन के अनुसार गौशाला में पशुओं के उपचार के दौरान केवल गिद्धों के लिए सुरक्षित दवाओं का उपयोग किया जा रहा है। गौशाला प्रबंधन ने स्पष्ट किया है कि डाइक्लोफेनाक, एसीक्लोफेनाक, कीटोप्रोफेन एवं निमेसुलाइड जैसी प्रतिबंधित एवं घातक दवाओं का प्रयोग नहीं किया जाएगा। आवश्यकता पड़ने पर केवल मेलॉक्सिकैम या टॉल्फेनामिक अम्ल जैसी सुरक्षित दवाएँ ही पंजीकृत पशु चिकित्सक की सलाह से उपयोग में लाई जाएंगी।
मृत पशुओं के सुरक्षित निस्तारण एवं जागरूकता गतिविधियाँ
गौशाला में मृत पशुओं के निस्तारण के लिए ऐसी व्यवस्था अपनाई गई है, जिससे गिद्धों को हानिकारक रासायनिक अवशेषों का खतरा न हो। इसके साथ ही गौशाला द्वारा गिद्ध संरक्षण से संबंधित जागरूकता गतिविधियों में भागीदारी, ग्रामीणों एवं गौसेवकों को सुरक्षित दवाओं के उपयोग के लिए प्रेरित करने तथा वन विभाग के संरक्षण प्रयासों में सहयोग की प्रतिबद्धता जताई गई है।
समापन (Impact Line)
वन विभाग को आशा है कि यह पहल अन्य गौशालाओं के लिए प्रेरणा बनेगी और क्षेत्र में गिद्ध संरक्षण के प्रयासों को व्यापक जनसहयोग प्राप्त होगा।
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