धर्मनगरी हरिद्वार में जूना अखाड़ा के संतों ने पुलिस पर उत्पीड़न और अमानवीय व्यवहार का आरोप लगाते हुए मुख्यमंत्री से न्याय की गुहार लगाई है। संतों ने चेतावनी दी है कि यदि दोषी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। कोटद्वार निवासी संत यति परमानंद गिरि ने अन्य संतों के साथ हरिद्वार के सर्वानंद घाट से सचिवालय तक पैदल यात्रा शुरू की। संतों का कहना है कि यह यात्रा न्याय की मांग को लेकर शांतिपूर्ण तरीके से निकाली जा रही है।
यति परमानंद गिरि को किया प्रताड़ित
संतों के अनुसार 5 फरवरी को कोटद्वार पुलिस ने यति परमानंद गिरि को एसओजी कार्यालय में बंद कर प्रताड़ित किया। आरोप है कि उनके साथ अमानवीय व्यवहार किया गया और भगवा वस्त्रों का अपमान किया गया। संतों ने इसे न केवल एक व्यक्ति का बल्कि सनातन परंपरा और संत समाज का अपमान बताया है। यति परमानंद गिरि ने कहा कि वे मुख्यमंत्री से मुलाकात कर पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच और संबंधित पुलिस कर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग करेंगे। उन्होंने कहा कि संत समाज कानून और संविधान का सम्मान करता है लेकिन अन्याय और उत्पीड़न को किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा। संतों की इस पदयात्रा को लेकर हरिद्वार और आसपास के क्षेत्रों में चर्चा का माहौल है। प्रशासन की ओर से फिलहाल मामले पर आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार किया जा रहा है।
Comments (0)