खड़गपुर: कभी खड़गपुर के कथित डॉन और स्क्रैप माफिया के रूप में चर्चित रहे बी. रामबाबू एक बार फिर सुर्खियों में हैं। अपराध जगत को अलविदा कहने का ऐलान करने के बाद लंबे समय तक सार्वजनिक चर्चाओं से दूर रहे रामबाबू इस बार मथुराकाटी की सार्वजनिक दुर्गा पूजा में मां दुर्गा की आरती करते नजर आए। प्रतिमा विसर्जन से पहले धार्मिक आयोजन में उनकी मौजूदगी ने खड़गपुर में चर्चाओं का दौर तेज कर दिया है।
वर्षों बाद सार्वजनिक मंच पर दिखे रामबाबू, लोगों में बढ़ी उत्सुकता
मथुराकाटी सार्वजनिक दुर्गा पूजा पंडाल में बी. रामबाबू को मां दुर्गा की आरती करते देख लोगों का ध्यान उनकी ओर खिंच गया। कभी खड़गपुर के अपराध जगत से जुड़े चर्चित नाम के तौर पर पहचाने जाने वाले रामबाबू की वर्षों बाद इस तरह सार्वजनिक मौजूदगी ने लोगों के बीच उत्सुकता बढ़ा दी। हालांकि, उनके इस बार पूजा में नजर आने के पीछे किसी खास वजह या नए घटनाक्रम की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
मथुराकाटी दुर्गा पूजा से पुराना जुड़ाव, बचपन से देखते आ रहे हैं आयोजन
मथुराकाटी की सार्वजनिक दुर्गा पूजा के साथ बी. रामबाबू का पुराना जुड़ाव बताया जाता है। इस पूजा को लंबे समय से उनके नाम के साथ भी जोड़ा जाता रहा है। बताया जाता है कि एक बार पूजा से संबंधों को लेकर सवाल पूछे जाने पर उन्होंने कहा था कि वह बचपन से इस पूजा को देखते आ रहे हैं और यह आयोजन उनके जन्म से भी पहले शुरू हो चुका था। ऐसे में विसर्जन से पहले उनकी मौजूदगी को लोग पूजा के साथ उनके पुराने रिश्ते के संदर्भ में भी देख रहे हैं।
मानस चौबे और गौतम चौबे हत्याकांड में काट चुके हैं जेल की सजा
बी. रामबाबू का अतीत भी खड़गपुर में लंबे समय तक चर्चा का विषय रहा है। वह सांसद-पुत्र मानस चौबे और गौतम चौबे हत्याकांड के सिलसिले में जेल की सजा काट चुके हैं। इसी वजह से उनका नाम शहर के चर्चित और विवादित व्यक्तियों में शामिल रहा। हालांकि, अपराध जगत को छोड़ने के अपने पुराने ऐलान के बाद वह लंबे समय तक सार्वजनिक चर्चाओं से दूर रहे।
मां दुर्गा की आरती ने फिर खींचा लोगों का ध्यान
मथुराकाटी दुर्गा पूजा पंडाल में बी. रामबाबू की मौजूदगी ने एक बार फिर उन्हें खड़गपुर की चर्चाओं के केंद्र में ला दिया है। एक तरफ पूजा के साथ उनके पुराने संबंधों की चर्चा है, तो दूसरी तरफ वर्षों बाद सार्वजनिक रूप से नजर आने को लेकर लोगों में जिज्ञासा बनी हुई है। फिलहाल, उनकी इस मौजूदगी को किसी नए राजनीतिक या सामाजिक घटनाक्रम से जोड़ने का कोई पुष्ट आधार सामने नहीं आया है।