कोलकाता: दुर्गा पूजा के बाद अब बंगाल में कोजागरी लक्ष्मी पूजा की रौनक है, लेकिन त्योहार की तैयारियों के बीच बढ़ती महंगाई ने आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है। फल, सब्जियों और पूजा में इस्तेमाल होने वाली जरूरी सामग्री की ऊंची कीमतों के कारण मध्यमवर्गीय परिवारों को अतिरिक्त खर्च करना पड़ रहा है। रविवार, 25 अक्टूबर को लक्ष्मी पूजा से पहले कोलकाता समेत राज्य के विभिन्न बाजारों में खरीदारी करने पहुंचे लोगों को अपने बजट के अनुसार सामान चुनने में मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।
पूजा सामग्री की कीमतों में भी उछाल
लक्ष्मी पूजा के लिए धान की बाली, अनाज के दाने और चांदमाला जैसी पारंपरिक सामग्री की जरूरत होती है। इस साल इन वस्तुओं की कीमतों में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। पिछले साल 1 से 2 रुपये में मिलने वाली धान की एक छोटी बाली अब करीब 5 रुपये में बिक रही है। वहीं, 5 ग्राम अनाज के दानों के एक पैकेट की कीमत 20 रुपये तक पहुंच गई है, जो पिछले साल के मुकाबले लगभग दोगुनी बताई जा रही है। पूजा में इस्तेमाल होने वाली चांदमाला 25 रुपये में बिक रही है। ऐसे में पूजा की शुरुआती खरीदारी से ही लोगों की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है।
सब्जियों के दाम ने बढ़ाई रसोई की चिंता
लक्ष्मी पूजा के भोग और घर की रसोई के लिए सब्जियां खरीदना भी आसान नहीं रह गया है। बाजार में परवल 80 रुपये प्रति किलो बिक रहा है, जबकि एक फूलगोभी की कीमत 70 से 80 रुपये तक पहुंच गई है। बैंगन 100 रुपये प्रति किलो और पत्तागोभी 40 से 50 रुपये प्रति किलो की दर से मिल रही है। टमाटर की कीमत 30 रुपये प्रति किलो है, लेकिन हरी मिर्च खरीदने के लिए ग्राहकों को 120 रुपये प्रति किलो खर्च करने पड़ रहे हैं। इन बढ़ती कीमतों के बीच आलू 15 रुपये प्रति किलो बिक रहा है, जिससे खरीदारों को कुछ राहत मिल रही है।
पूजा के फलों की खरीदारी भी महंगी
लक्ष्मी पूजा में फल चढ़ाने की परंपरा के कारण त्योहार से पहले फलों की खरीदारी भी बढ़ जाती है। लेकिन इस बार फलों की कीमतें भी लोगों के बजट पर असर डाल रही हैं। बाजार में अच्छी गुणवत्ता वाले सेब और अंगूर 200 रुपये प्रति किलो बिक रहे हैं। अनार की कीमत 250 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है। अच्छी गुणवत्ता वाले एक जोड़ी केले 20 रुपये में मिल रहे हैं, जबकि मध्यम आकार के एक संतरे की कीमत 15 रुपये है। वहीं, एक अनानास 80 रुपये और शरीफा 200 रुपये प्रति किलो बिक रहा है।
त्योहार की रौनक के बीच बजट संभालने की चुनौती
बंगाली परिवारों के लिए कोजागरी लक्ष्मी पूजा धार्मिक आस्था के साथ परंपरा और भावनाओं का भी प्रतीक है। ऐसे में पूजा की तैयारियों में जरूरी सामान की खरीदारी से बचना आसान नहीं है। हालांकि, बढ़ती कीमतों के कारण लोगों को अपनी जरूरतों और खर्च के बीच संतुलन बनाना पड़ रहा है। कई परिवार सीमित बजट में पूजा की तैयारी करने के लिए खरीदारी की सूची छोटी कर रहे हैं, तो कुछ को जरूरी सामग्री के लिए अधिक पैसे खर्च करने पड़ रहे हैं।
बाजार में राहत का इंतजार कर रहे खरीदार
लक्ष्मी पूजा से ठीक पहले बढ़े बाजार भाव ने मध्यमवर्गीय परिवारों की चिंता बढ़ा दी है। त्योहार की परंपराओं को निभाने के साथ घरेलू खर्च संभालना अब बड़ी चुनौती बन गया है। आम खरीदारों को उम्मीद है कि जल्द ही जरूरी सामान की कीमतों में राहत मिलेगी, ताकि वे बिना ज्यादा आर्थिक दबाव के त्योहार मना सकें।