मध्य प्रदेश सरकार ने अपने तीन नए वेटलैंड्स (आद्रभूमि) को रामसर साइट का दर्जा प्रदान कर दिया हैं| लेकिन रामसर साइट में शामिल होने के लिए इंतजार कर रही राज्य की बाकी आर्द्रभूमियों की यात्रा के जल्द पूरा होने के आसार नजर नहीं आ रहे हैं। राज्य में ऐसे कई वेटलैंड्स हैं जिनके संरक्षण के लिए उन्हें चिन्हित तो किया गया है। मगर इनमें से एक-दो को छोड़कर किसी को भी भविष्य के लिए रामसर में नामित करने के लिए आधिकारिक तौर पर अधिसूचित नहीं किया गया है। दरअसल यह राज्य सरकार की ओर से की जाने वाली एक प्रशासनिक प्रक्रिया है जो जल निकायों को कानूनी दर्जा देती है और संरक्षण में उनकी सहायता करती है|
रामसर साइट और वेटलैंड
अंतरराष्ट्रीय महत्व की वो आर्द्रभूमि हैं जिन्हें दुर्लभ या अद्वितीय आर्द्रभूमि प्रकार या जैविक विविधता के संरक्षण में उनके महत्व के लिए नामित किया जाता है।
स्टेट वेटलैंड अथॉरिटी ने करीब एक साल पहले वेटलैंड रूल्स 2017 के तहत छह झीलों की अधिसूचना के लिए राज्य सरकार को प्रस्ताव भेजा था। इरादा इन झीलों को अधिसूचित करने का था ताकि इन्हें संरक्षण की सुविधा प्रदान की जा सके और उनके नाम अगले नामांकन दौर में रामसर स्थानों का दर्जा दिए जाने के लिए सुझाए जा सकें। इन नामों में शिवपुरी जिले में जाधव सागर और माधव सागर झीलें, सागर जिले में सागर झील, अशोकनगर जिले के ईसागढ़ में सिंध सागर, रतलाम में अमृत सागर और दतिया जिले में सीता सागर शामिल हैं।
इसके अलावा राज्य ने मध्य प्रदेश में 120 आर्द्रभूमियों की एक सूची केंद्र सरकार को भेजी है। इन सभी का राष्ट्रीय जलीय पारिस्थिकी संरक्षण योजना (एनपीसीए) के तहत संरक्षण और कायाकल्प कार्यक्रम में शामिल किया गया है।
मध्य प्रदेश में अब कुल चार रामसर स्थान हैं। भोज वेटलैंड और बड़ा तालाब के नाम से जाने जाने वाली अपर लेक को 2002 में मध्य प्रदेश की पहली रामसर साइट घोषित किया गया था। उसके दो दशक बाद 2022 में इंदौर के दो जल निकायों ‘यशवंत सागर झील’ और ‘सिरपुर झील’ को रामसर साइट घोषित किया गया। इसी साल बाद में, शिवपुरी की साख्या सागर झील को भी रामसर साइट का दर्जा मिल गया था।
वेटलैंड्स को रामसर में नामित करने के लिए अधिसूचना जारी करना एक स्वतंत्र प्रक्रिया है। यह नामित रामसर साइटों के निरंतर संरक्षण के लिए एक महत्वपूर्ण कदम भी है।
अधिसूचना- संरक्षण की तरफ एक महत्वपूर्ण कदम
राज्य सरकार की ओर से वेटलैंड्स की अधिसूचना, संरक्षण की दिशा में सबसे महत्वपूर्ण कदम है। यह वेटलैंड्स की सीमाओं का निर्धारण करने के अलावा इसके ‘प्रभाव क्षेत्र’ की पहचान करने के लिए एक नक्शा तैयार करता है। ऐसा करना वेटलैंड नियम 2017 के तहत अनिवार्य है। प्रभाव क्षेत्र में प्रतिबंधित, विनियमित और अनुमत गतिविधियों पर निर्णय लेने के लिए नक्शे की जरूरत होती है। आर्द्रभूमि के प्रभाव का क्षेत्र एक ऐसा क्षेत्र है जहां विकासात्मक गतिविधियों से आर्द्रभूमि के पारिस्थितिकी तंत्र संरचना और पारिस्थितिक कार्यप्रणाली में प्रतिकूल बदलाव होने की संभावना होती है। प्रभाव क्षेत्र की सीमा को परिभाषित करते समय विशेषज्ञ स्थानीय जल विज्ञान और भूमि उपयोग की प्रकृति पर विचार करते हैं।
अधिसूचना प्रक्रिया पर असर डालता राजनीतिक प्रभाव
सरकारें आर्द्रभूमियों की अधिसूचना में सक्रिय तौर पर रुचि नहीं लेती हैं। उनके लिए ऐसा करना विवादों के भानुमती का पिटारा खोलने जैसा है। वाघमारे ने बताया, “अधिसूचना के बाद आर्द्रभूमि और उसके आसपास की गतिविधियों को विनियमित करने के अलावा आर्द्रभूमि की सीमाओं का निर्धारण किया जाता है। किसानों और मछुआरों के साथ-साथ उसके आस-पास रहने वाले तमाम लोग अपनी आजीविका के लिए आर्द्रभूमि से जुड़े होते हैं और अधिसूचना जारी होने का इन सभी लोगों पर सीधा असर पड़ता है। ये लोग राजनेताओं के वोट बैंक होते हैं, इसलिए राजनीतिक नेता वेटलैंड की सीमा का निर्धारण करने या आर्द्रभूमि के आसपास की गतिविधियों को विनियमित करने में रुकावटें डालते रहते हैं।
वाइज यूज’ दृष्टिकोण
अधिसूचित आर्द्रभूमियों के संरक्षण और प्रबंधन के मामले में वाइज यूज’ दृष्टिकोण अपनाए जाने की सिफारिश की गई है। वाइज यूज का मतलब इंसानों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए आर्द्रभूमि सहित वन्य जीवों के संसाधनों का सतत उपयोग। इंसान और उनके द्वारा संसाधनों का इस्तेमाल आर्द्रभूमि पारिस्थितिकी तंत्र की गतिशीलता का एक अनिवार्य घटक है।
रामसर कन्वेंशन
रामसर कन्वेंशन वेटलैंड्स के ‘वाइज यूज’ को सतत विकास के संदर्भ में पारिस्थितिकी तंत्र के दृष्टिकोण के कार्यान्वयन के माध्यम से हासिल किए गए उनके पारिस्थितिक चरित्र के रखरखाव के रूप में परिभाषित करता है। पारिस्थितिक तंत्र के दृष्टिकोण के लिए विभिन्न पारिस्थितिकी तंत्र तत्वों और एकीकृत भूमि, जल और जीवित संसाधनों के प्रबंधन को बढ़ावा देने के बीच जटिल संबंधों पर विचार करने की आवश्यकता है। टिकाऊ विकास पर जोर देते हुए वाइज यूज संसाधनों के उपयोग के ऐसे तरीकों की जरूरत की बात कहता है जिससे न सिर्फ वर्तमान में बल्कि भविष्य में भी आर्द्रभूमि पर मानव निर्भरता को बनाए रखा जा सके।
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