आमतौर पर आप ने जनता को विकास कार्यों में भ्रष्टाचार पर आरोप लगाते हुए कई बार सुना होगा लेकिन अगर यही मामला चुने हुए जनप्रतिनिधि के माध्यम से सामने निकल कर आए तो मामला और गंभार हो जाता है। जी हां ऐसा ही एक मामला पन्ना जिले की गुनौर विधानसभा के ग्राम पंचायत पटना तमोली का है जहां पर नवनिर्वाचित सरपंच द्वारा जिला पंचायत सीईओ को एक पत्र लिखा गया है। जिसमें उन्होंने इस बात का उल्लेख किया है कि क्या इस देश में ईमानदार होना गलत है। मेरी ग्राम पंचायत में उपयंत्री द्वारा मुझसे कमीशन मांगा जा रहा है और कहा जा रहा है यह कमीशन ऊपर तक देना होता है।
सरपंच की आपत्ति को ठंडे बस्ते में डाल दिया
अब ऐसे में मैं कैसे ग्राम पंचायत का विकास करू वहीं इस पूरे मामले में जिला प्रशासन ने सरपंच की आपत्ति को ठंडे बस्ते में डाल दिया है जिस पर सरपंच ने मंत्री से लेकर अधिकारियों तक भी इसकी शिकायत की है। अब ऐसे में सवाल ये खड़े होते हैं कि जनता के चुने हुए अगर जनप्रतिनि ही अपनी समस्या का निराकरण नहीं करा पा रहे हैं तो आम जनता के हाल क्या होंगे। शिवराज जी की भ्रष्टाचार को लेकर जीरो टॉलरेंस नीति कैसे सफल हो सकेगी ।
जो मेरे ऊपर लगाए जा रहे हैं वह निराधार है
वहीं जिन उपयंत्री पर सरपंच ने आरोप लगाया है उनका साफ कहना है कि यह सब आरोप जो मेरे ऊपर लगाए जा रहे हैं वह निराधार है। जब इस पूरे मामले पर जिले में दौरा कर रहे प्रभारी मंत्री रामकिशोर नानो कावरे से बात की गई तो उन्होंने इस पूरे मामले पर जांच कर दोषियों पर कार्यवाही की बात कही।
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भ्रष्टाचार बड़े पैमाने पर पनप रहा है
जिस तरह प्रदेश सरकार भ्रष्टाचार को लेकर लगाम लगाने की बात कह रही है और आम जनता के बीच से भी शिकायतें आ रही हैं। लेकिन जब वही चुने हुए जनप्रतिनिधि भी इस आरोप की पुष्टि सुनिश्चित कर दें तब यह बात स्पष्ट होती है कि, तंत्र में कहीं ना कहीं तो भ्रष्टाचार बड़े पैमाने पर पनप रहा है। और पन्ना जिले में अधिकारी इस भ्रष्टाचार का हिस्सा बने हुए हैं। इसीलिए सरपंच के शिकायती पत्र पर भी किसी भी प्रकार की कोई कार्यवाही नहीं हो रही है।
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