मध्यप्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री आरिफ अकील का आज यानी की सोमवार को निधन हो गया। आरिफ ने 72 साल की उम्र में अंतिम सांस ली है। जिसके बाद पूरे कांग्रेस में शोक की लहर दौड़ गई। आपको बता दें कि, आरिफ अकील लंबे समय से बीमार चल रहे थे। दरअसल, रविवार को कांग्रेस के वरिष्ठ नेता आरिफ अकील की तबीयत अचानक खराब हुई थी। जिसके बाद उन्हें एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। जहां उनकी हालत नाजुक बनी हुई थी और डॉक्टर की निगरानी में उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया था। जिसके बाद आज सुबह ही उन्होंने अस्पाल में ही अंतिम सांस ली। करीबियों और पारिवारिक सूत्रों ने अकील के इंतकाल की आधिकारिक पुष्टि कर दी है।
पिछले साल हार्ट में दिक्कत हुई थी
बता दें कि आरिफ अकील को पिछले साल हार्ट में दिक्कत हुई थी। 2023 की शुरुआत में ही उनकी तबियत बिगड़ गई थी। जांच में सामने आया कि उनके हार्ट में बड़े ब्लॉकेज थे। गुरुग्राम के मेंदाता में उनकी हार्ट सर्जरी भी हुई थी। सर्जरी के बाद उन्होंने चुनाव नहीं लड़ा और बेटे आतिफ को पार्टी ने भोपाल उत्तर से उम्मीदवार बनाया था।
कांग्रेस सरकार में 2 बार मंत्री रह चुके
बता दें कि आरिफ अकील पहली बार 1990 में भोपाल उत्तर से निर्दलीय विधायक चुने गए थे। साल 1993 में बीजेपी के रमेश शर्मा ने अकील को हरा दिया। हालांकि इसके बाद के चुनाव में भोपाल उत्तर सीट आरिफ अकील का गढ़ बन गई। वे 1998 से लेकर 2018 तक लगातार 6 बार इस सीट से विधायक चुने गए। वहीं तबियत खराब होने की वजह से 2023 में अरिफ की जगह उनके बेटे आतिफ अकील को कांग्रेस ने उम्मीदवार बनाया। उन्होंने ने पिता के नक्शे कदम पर चलते हुए जीत दर्ज की। बता दें कि आरिफ एमपी की कांग्रेस सरकारों में 2 बार मंत्री भी रह चुके हैं।
लोग कहते थे शेरे-भोपाल
उन्हें शेरे-भोपाल कहा जाता था। इसकी भी एक वजह है। उन्होंने कहा कि दो दशक से हर कोशिश करने के बाद भी भाजपा भोपाल उत्तर का किला नहीं ढहा पाई। लोगों की मानें तो आरिफ अकील काम में कभी भी भेदभाव नहीं करते थे। उनके अनुसार जो उनके पास आ गया वो उनका था।
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