छत्तीसगढ़ के आरक्षण मामले में सियासत थमने का नाम नहीं ले रही है। अब यह मामला तूल पकड़ता हुआ तब दिखाई दे रहा है जब सरकार की तरफ से निगम मंडल आयोग और बोर्ड में नियुक्तियां की गई हैं। इतना ही नहीं एससी और एसटी को लड़ाने के आरोप लगाते हुए विपक्ष ने कांग्रेस पर फूट डालो शासन करो अंग्रेजों की नीति अपनाने का आरोप लगा डाला है। मामले में सत्तापक्ष विपक्ष को उसका इतिहास याद दिला रहा है।
आरक्षण को असंवैधानिक करार दिया है
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने जब से 50% से ज्यादा आरक्षण को असंवैधानिक करार दिया है तब से प्रदेश में अलग ही बवाल मचा हुआ है। बवाल इस बात का है कि एससी एसटी और अन्य पिछड़ा वर्ग का आरक्षण अपने आप काम हुआ है। ऐसे में अब सरकार की जिम्मेदारी है कि वह किस वर्ग का आरक्षण कम करें और किसका नहीं। दूसरी तरफ प्रदेश का आदिवासी वर्ग अलग नाराज है हालांकि सरकार सभी वर्गों को मनाने की कोशिश कर रही है और आरक्षण मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी में है। लेकिन इधर विपक्ष आरक्षण मामले पर सत्ता पक्ष को लगातार घेरती हुई दिखाई दे रही है।
भारतीय जनता पार्टी की तरफ से लगातार सत्ता पक्ष पर सवाल खड़े किए जा रहे
यही कारण है कि भारतीय जनता पार्टी की तरफ से लगातार सत्ता पक्ष पर सवाल खड़े किए जा रहे हैं। एक बार फिर से भारतीय जनता पार्टी के आदिवासी नेता और पूर्व मंत्री केदार कश्यप ने सरकार पर आरोप लगाया है और इस आरोप में हवाला दिया है कि प्रदेश सरकार ने जो निगम मंडलों में नियुक्तियां की है उसमें कुछ नाम ऐसे हैं। जिन्होंने अनुसूचित जाति और आदिवासी आरक्षण को लेकर कोर्ट में पिटीशन दायर की थी। जिनको इनाम के तौर पर आयोग का अध्यक्ष बना दिया गया है। पूर्व मंत्री केदार कश्यप ने प्रदेश सरकार पर आरोप लगाया है कि कांग्रेस पार्टी प्रदेश के अलग-अलग वर्ग और समाज को लड़ाने का काम कर रही है।
आरक्षण की लड़ाई अब डीएनए तक आई
छत्तीसगढ़ में आरक्षण की लड़ाई अब डीएनए तक आई। डीएनए का मतलब बीजेपी कांग्रेस पर अंग्रेजों का वंशज होने का आरोप लगा रही है। तो कांग्रेस पार्टी भी उल्टा बीजेपी पर अंग्रेजों की औलाद होने का गंभीर आरोप लगा रही है। बीजेपी के आरोपों पर कांग्रेस पार्टी ने स्पष्ट कहा है कि पहले भारतीय जनता पार्टी अपना इतिहास खंगालने उसके बाद उन्हें हकीकत पता चल जाएगी।
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आरक्षण की लड़ाई अब बढ़ती हुई दिखाई दे रही
छत्तीसगढ़ में आरक्षण की लड़ाई अब बढ़ती हुई दिखाई दे रही है क्योंकि बात अब राजनीतिक दलों के द्वारा अंग्रेजों की नीति और वंशज होने तक पहुंच गई है। ऐसे में सवाल ये उठता है कि आरक्षण का विषय भटक तो नहीं गया ? या भटकाने की कोशिश की जा रही है ? क्योंकि आदिवासी हो चाहे अनुसूचित जाति वर्ग के लोग हो या फिर चाहे अन्य पिछड़ा वर्ग के लोग। इन सब की जरूरत बीजेपी को भी है और कांग्रेस को भी।
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