बैतूल: लंपी वायरस के चलते ग्रामीणों ने लिया पूजा पाठ का सहारा,पांच दिन के लिए लगाए प्रतिबंध,गांव में कोई भी मांस मदिरा का सेवन नही करेगा,सिर पर दो बर्तन में पानी नही लाएंगे, लकड़ी का गठ्ठा सिर पर नही लाएंगे,ग्रामीण बोले दैवीय प्रकोप है, प्रतिबंध के उल्लंघन पर 10 हजार का जुर्माना।
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ग्रामीण इसे दैवीय प्रकोप मान रहे
बैतूल में लंपी वायरस से पशुओं की मौत से परेशान ग्रामीण इसे दैवीय प्रकोप मान रहे है और देवी को मनाने के लिए पूजा पाठ का सहारा ले रहे है । ग्रामीणों ने पांच दिन के लिए कुछ प्रतिबंध भी लगाए है । इनका उल्लंघन करने पर 10 हजार का जुर्माना तय किया है। बैतूल जिले में लंपी बीमारी के प्रकोप से मवेशियों की जान जा रही है। ऐसे में ग्रामीण बीमारी को दैवीय प्रकोप मानते हुए इससे छुटकारा पाने के लिए अपने स्तर पर नियम बनाने लगे हैं।
लंपी के प्रकोप को खत्म करने के लिए सख्त नियम बना लिए
बैतूल ब्लाक के गांव बोदी जूनावानी के ग्रामीणों ने भी लंपी के प्रकोप को खत्म करने के लिए सख्त नियम बना लिए हैं । जिनका सभी ग्रामीणों को 5 दिनों तक पालन करना अनिवार्य है। नियमों का उल्लंघन करने पर 10 हजार रुपए का जुर्माना भी रखा गया है। बताया जा रहा है कि, लंपी बीमारी से पशुओं की बीमार होने के बाद मौत हो रही है। यही वजह है कि, पशु पालक सहित ग्रामीण बुरी तरह से परेशान हो गए हैं।
घर में तेल से बघार नहीं लगाया जाएगा
पांच दिवसीय नियम बनाए गए हैं। जिन्हें सभी को मानना अनिवार्य है। इसमें किसी भी घर में तेल से बघार नहीं लगाया जाएगा। कोई भी महिला अथवा पुरूष लकड़ी का गट्ठा सिर पर नहीं रखेगा और ना ही महिलाएं कुंए, हैण्डपंप से डबल गुंडी (बेहड़े) से पानी भरेंगी, गांव में कोई भी मांस मदिरा का सेवन नहीं करेगा। बोदी जुनावानी के ग्रामीणों ने लंपी बीमारी से सप्ताह भर में दर्जन भर मवेशियों की मौत के बाद इस बीमारी को दैविक प्रकोप मानते हुए गांव में अनोखे निर्णय लिए है ताकि बीमारी से निजात मिल सके।
ग्रामीणों ने एक साथ पूजन कर यह निर्णय लिया
गांव की सीमा पर ग्रामीणों ने एक साथ पूजन कर यह निर्णय लिया है कि, जब तक मवेशियों पर आयी लंपी बीमारी ठीक नहीं हो जाती कोई भी ग्रामीण मदिरा मांस का सेवन नहीं करेगा। इन सभी नियमो का पालन नहीं करने वालो पर 10 हजार रूपये का जुर्माना लगेगा। इन नियमो का ग्रामीण कड़ाई से पालन कर रहे है।
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