मध्य प्रदेश विधानसभा चुनावों में कराती हार के बाद अब कांग्रेस आलाकमान एक्शन मोड में आ गये हैं। मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ विधानसभा चुनाव में पार्टी की हार के मद्देनजर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष का पद छोड़ सकते हैं। सूत्रों के अनुसार, मंगलवार को राष्ट्रीय राजधानी में कांग्रेस आलाकमान से मुलाकात करने वाले पूर्व सीएम को नया प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त करने का निर्देश दिया गया है। बता दें कि कांग्रेस के प्रदेश प्रमुख कमलनाथ ने दिल्ली पहुंचकर पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और सांसद राहुल गांधी से उनके आवास पर मुलाकात की थी। बता दें कि चुनावों और उससे पहले कमलनाथ को आलाकमान ने फ्री हैंड दिया था और वह अपने हिसाब से फैसले ले रहे थे। अब इस हार के बाद आलाकमान हार के कारणों की समीक्षा कर रहा है। बताया जा रहा है कि इसके तहत ही सबसे पहले कमलनाथ को इस्तीफा देने के लिए कहा गया है।
केसी वेणुगोपाल भी मौजूद रहे
सूत्रों ने बताया कि इस बैठक में अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के महासचिव (संगठन) केसी वेणुगोपाल भी मौजूद थे। बता दें कि मध्य प्रदेश में 17 नवंबर को एक ही चरण में 230 विधानसभा सीटों के लिए मतदान हुआ था। वहीं तीन अन्य राज्यों छत्तीसगढ़, राजस्थान और तेलंगाना के साथ इसके नतीजे 3 दिसंबर को घोषित किए गए। सत्ता की कुर्सी पर पहले से काबिज भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने परिणाम के तहत दो तिहाई बहुमत हासिल किया। कांग्रेस पिछले चुनाव की अपेक्षा आधी सीट में ही सिमटकर रह गई। 230 विधानसभा सीटों पर हुए चुनाव में भाजपा ने 163 सीटों पर जीत दर्ज की है. कांग्रेस 66 सीटों पर सिमट गई।
मध्य प्रदेश की जनता का फैसला मुझे स्वीकार- कमलनाथ
चुनाव में मिली हार के बाद कमलनाथ ने कहा था कि चुनाव परिणाम में मध्य प्रदेश की जनता का फैसला मुझे स्वीकार है। हमें विपक्ष में बैठने की जिम्मेदारी दी गई है और हम अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन करेंगे। मध्य प्रदेश के सामने अभी सबसे बड़ा सवाल यही है कि मध्य प्रदेश के युवाओं का भविष्य सुरक्षित हो, हमारे किसानों को खुशहाली मिले। इसके साथ ही कमलनाथ ने कहा कि मैं भारतीय जनता पार्टी को बधाई देता हूं। मुझे आशा है कि जनता ने उनके ऊपर जो विश्वास दिखाया है, वे उस पर खरा उतरने की कोशिश करेंगे।
सरकार अल्पमत में आने के बाद गिर गई
पिछले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस 114 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी जबकि बीजेपी 109 सीटों के साथ काफी पीछे थी। आखिरकार कांग्रेस सत्ता में आई और कमलनाथ ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। हालांकि, इससे पहले 2020 में राज्य में राजनीतिक उथल-पुथल मची थी, जब तत्कालीन कांग्रेसी ज्योतिरादित्य सिंधिया, 22 वफादार विधायकों के साथ, भगवा खेमे में चले गए थे। इसके बाद कांग्रेस सरकार अल्पमत में आने के बाद गिर गई और भाजपा ने राज्य में सरकार बनाई, और शिवराज सिंह चौहान मुख्यमंत्री के रूप में लौट आए।
Comments (0)