शाजापुर। कुत्ता अगर किसी को काट ले तो उसे तुरंत उपचार दिया जाना चाहिए नहीं तो इंसान पागल हो जाता है या उसकी मौत निश्चित है। शहर में भी अभी तक 300 से अधिक लोग कुत्तों के शिकार हो चुके हैं। जिन्हें उपचार तो मिल गया। लेकिन कुत्तों का आतंक अब लोगों के लिए खौफ का पर्याय बन चुका है। अभी तक अधिकारी नहीं जागे हैं। जिला अस्पताल के आंकड़ों की यदि बात करें, तो नवंबर माह में करीब 300 लोग कुत्तों के शिकार होकर यहां पहुंचे हैं, तो इस माह यह संख्या 30 तक पहुंच चुकी है। यानि हर दिन कोई न कोई इन आवारा कुत्तों का शिकार हो रहा है
इंदौर में उपचार के दौरान मौत भी हो चुकी
एक दिन पहले ही कुत्ते का शिकार हुए एक आठ वर्षीय बालक की इंदौर में उपचार के दौरान मौत भी हो चुकी है, हालात ये हैं कि कोई बाईक पर हो या पैदल भी चल रहा, तो कुत्तों का झुंड उसे अपना निशाना बनाने के लिए रेस लगाने लगते हैं। ऐसे में बाईक सवार के साथ हादसा होने की भी संभावना बढ़ जाती है। इसे लेकर अधिकारी दावे तो करते हैं लेकिन कार्यवाही न होने से कुत्तों का आतंक जिलेवासियों के लिए मुसीबत बना हुआ है।
अब तक नहीं शुरू किया अभियान
हर माह जिला अस्पताल में रेबीज के टीके लगवाने के लिए लोग पहुंचते हैं। लेकिन इस बीमारी को जड़ से खत्म करने के लिए जिम्मेदार गंभीर नहीं है। जब भी इस तरह की घटनाएं होती हैं तो अधिकारियों के दावे का दायरा बढ़ जाता है और वे एक दो दिन में ही इस समस्या को पूरी तरह खत्म करने का मजबूत दावा करते हैं। लेकिन अगले ही दिन उसकी हवा निकल जाती है।
यही वजह है कि अब तक यह अभियान केवल कागजों और आश्वासनों पर ही चला आ रहा है। न कुत्तों को पकड़ने के लिए नगर पालिका ने कोई कार्यवाही की है और नहीं वरिष्ठ अधिकारियों ने इसके लिए कोई कदम उठाए हैं। सबसे ज्यादा परेशानी रात में होती है जब कुत्तों का झुंड बीच सड़क पर बैठकर राहगीरों के काटने उनके पीछे दौड़ लगाते हैं। और वाहन चालक उनसे बचने के चक्कर में हादसे का शिकर हो जाता है।
ये भी पढ़े- इंडियन नेवी में 275 पदों पर निकली भर्ती, 2 जनवरी तक करें अप्लाई
झोंकर में बुझ गया घर का चिराग
झोंकर निवासी एक व्यक्ति के आठ वर्षीय बालक को तीन दिन पहले एक कुत्ते ने अपना शिकार बनाया था। जिसने सोमवार को इंदौर के एक निजी अस्पताल में उपचार के दौरान दम तोड़ दिया। इसके बाद बालक के पिता ने 181 सहित सीएमएचओ को भी इसकी शिकायत की, कि अब और किसी के साथ इस तरह का हादसा न हो। लेकिन शिकायत के 24 घंटे बाद भी जिम्मेदारों की नींद नहीं खुली है। शायद वे किसी बड़े हादसे के इंतजार में हैं।
Comments (0)