मध्य प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष कमलनाथ ने आलाकमान की तरफ से इस्तीफा मांगे जाने की खबरों का खंडन किया है। कमलनाथ ने कहा कि मुझसे इस्तीफा नहीं मांगा गया है, ये बस अफवाह है। उन्होंने आगे बताया कि मंगलवार को भोपाल में विधायक दल की बैठक होगी। इससे पहले सूत्रों ने जानकारी दी थी कि कांग्रेस को मिली हार के बाद कांग्रेस आलाकमान ने कमलनाथ से प्रदेशाध्यक्ष पद से इस्तीफा मांग लिया है।
कांग्रेस के खेमे में हलचल
बीजेपी ने रविवार को मध्य प्रदेश विधानसभा की 230 सीटों में से 163 सीटें जीतकर दो-तिहाई बहुमत हासिल कर लिया जबकि कांग्रेस 66 सीटों पर ही सिमट गई। इसके बाद से ही कांग्रेस के खेमे में हलचल है। दरअसल, मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव का प्रचार के केंद्र बिंदु पीसीसी चीफ कमलनाथ ही रहे। राजनीतिक जानकारों का ये भी कहना है कि इसका भी कांग्रेस को नुकसान हुआ है। साथ ही इसके और भी कई सियासी मायने निकाले जा रहे हैं। हालांकि कमलनाथ अपनी सीट बचाने में कामयाब रहे लेकिन प्रदेशाध्यक्ष होने के नाते उनके नेतृत्व में पार्टी को भारी हार का सामना करना पड़ा।
कमलनाथ के साथ कांग्रेस के 17 उम्मीदवार जीतें
बता दें कि मध्य प्रदेश के महाकौशल इलाके में जबलपुर, छिंदवाड़ा, बालाघाट, सिवनी, नरसिंहपुर, मंडला, डिंडोरी और कटनी जिले आते हैं। इन 8 जिलों में कुल 38 विधानसभा सीटें हैं, जिनमें इस बार बीजेपी के 21 उम्मीदवार चुनाव जीतकर MLA बने हैं। कमलनाथ के साथ कांग्रेस के 17 उम्मीदवार जीतने में कामयाब हुए है। कमलनाथ सरकार में वित्त मंत्री तरुण भनोट और विधानसभा अध्यक्ष एनपी प्रजापति के साथ विधानसभा उपाध्यक्ष हिना कांवरे को भी हार का सामना करना पड़ा है।
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