सुबह की सभा में ब्रम्हनाद के शीर्षस्थ साधकों ने अपने गायन-वादन से रसिकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। सभाओं का शुभारंभ पारम्परिक रूप से ईश्वर को अर्पित ध्रुपद गायन के साथ हुआ। तानसेन संगीत महाविद्यालय, ग्वालियर के विद्यार्थियों द्वारा राग देसी ताल चौताल में निबद्ध बंदिश रघुवर की छवि सुन्दर…. से भगवान श्रीराम के प्रति अनन्त आस्था एवं श्रद्धा को वर्णित किया। पखावज पर जगत नारायण शर्मा ने संगत दी। वहीं शाम की सभा में दिल्ली की शुभा मुद्गल के गायन के साथ मुंबई के पंडित रोनू मजूमदार के बांसुरी वादन की प्रस्तुति खास रही।
सुरों के सरताज तानसेन की याद में शुरू हुए तानसेन समारोह-2024 का तीसरा दिन सुखद और मखमली अहसासों से सराबोर कर गया।