उत्तर प्रदेश के प्रयागराज जिले में आयोजित माघ मेला को तकनीक से जोड़ते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक नई डिजिटल पहल की शुरुआत की है। शनिवार को माघ मेला क्षेत्र पहुंचे मुख्यमंत्री ने ‘माघ मेला सेवा ऐप’ का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने आगामी स्नान पर्वों को लेकर अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के साथ समीक्षा बैठक भी की और व्यवस्थाओं को और बेहतर बनाने के निर्देश दिए।
माघ मेला सेवा ऐप का उद्देश्य
माघ मेला सेवा ऐप का मुख्य उद्देश्य मेला क्षेत्र में आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को डिजिटल माध्यम से त्वरित और प्रभावी सेवाएं उपलब्ध कराना है। यह ऐप श्रद्धालुओं को जानकारी, मार्गदर्शन और समस्या समाधान का एक आसान प्लेटफॉर्म प्रदान करता है, जिससे उन्हें प्रशासनिक सहायता के लिए भटकना न पड़े।
श्रद्धालुओं को मिलेगा डिजिटल मार्गदर्शन
इस ऐप के माध्यम से श्रद्धालु मेला क्षेत्र से जुड़ी विभिन्न जानकारियां प्राप्त कर सकेंगे। इसमें रास्तों की जानकारी, जरूरी सेवाओं की लोकेशन और प्रशासन से संपर्क जैसी सुविधाएं शामिल हैं। मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि तकनीक के उपयोग से श्रद्धालुओं का अनुभव बेहतर होगा और व्यवस्थाएं अधिक पारदर्शी बनेंगी।
QR कोड से सीधे प्रशासन तक पहुंचेगी समस्या
मेला अधिकारी ऋषिराज के अनुसार, मेला क्षेत्र में बिजली के सभी खंभों पर QR कोड लगाए गए हैं। श्रद्धालु इन QR कोड को स्कैन कर एक डिजिटल फॉर्म खोल सकते हैं, जिसमें वे अपनी समस्या या शिकायत दर्ज कर सकते हैं। यह शिकायत सीधे मेला प्रशासन तक पहुंच जाएगी।
हर शिकायत पर होगा त्वरित एक्शन
QR कोड के माध्यम से प्राप्त शिकायतों को मेला प्रशासन के विभिन्न विभागों की टीमें देखेंगी। संबंधित विभाग समस्या का संज्ञान लेकर त्वरित समाधान सुनिश्चित करेगा। इससे सफाई, सुरक्षा, स्वास्थ्य, बिजली या अन्य व्यवस्थाओं से जुड़ी समस्याओं का तुरंत निवारण संभव हो सकेगा।
माघ मेला में पहली बार मिली यह सुविधा
यह पहली बार है जब माघ मेला में श्रद्धालुओं के लिए इस तरह की डिजिटल शिकायत और मार्गदर्शन प्रणाली शुरू की गई है। प्रशासन का मानना है कि इससे न केवल व्यवस्थाएं मजबूत होंगी, बल्कि श्रद्धालुओं का भरोसा भी बढ़ेगा।
स्नान पर्वों से पहले व्यवस्थाओं की समीक्षा
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने माघ मेला क्षेत्र का दौरा कर आगामी प्रमुख स्नान पर्वों की तैयारियों की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा, सुविधा और स्वच्छता में किसी तरह की कमी न रहने पाए और डिजिटल सुविधाओं का अधिकतम लाभ लोगों तक पहुंचे।
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