मध्य प्रदेश के इंदौर शहर के भागीरथपुरा क्षेत्र में गंदा पानी पीने से फैल रही जलजनित बीमारी अब गंभीर स्थिति में पहुंच गई है। रविवार को स्वास्थ्य प्रशासन ने इसे आधिकारिक रूप से महामारी (Epidemic) घोषित कर दिया। अब तक इस बीमारी से 17 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि नए मामलों के सामने आने का सिलसिला जारी है।
मृतकों की संख्या 17 पहुंच गई
सोमवार सुबह एक और मरीज की मौत के साथ मृतकों की संख्या 17 पहुंच गई। मृतक की पहचान सेवानिवृत्त पुलिसकर्मी ओमप्रकाश शर्मा के रूप में हुई है, जिन्हें एक जनवरी को उल्टी-दस्त की शिकायत के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया था। वर्तमान में आठ मरीज आईसीयू में गंभीर स्थिति में हैं। हालात की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने सभी गंभीर मरीजों को शहर के बड़े निजी अस्पतालों में शिफ्ट किया है। स्थिति का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि शहर के सभी 85 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों के डॉक्टरों को भागीरथपुरा क्षेत्र में तैनात किया गया है, जिससे अन्य इलाकों में स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो रही हैं।
नर्मदा जल सप्लाई को फिलहाल बंद रखा गया
17 मौतों के बाद भी हालात सामान्य नहीं हो सके हैं। अब तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि नर्मदा जल आपूर्ति में दूषित पानी कहां से और कैसे मिला। इसी कारण नर्मदा जल सप्लाई को फिलहाल बंद रखा गया है। इसके अलावा, बोरिंग के पानी में भी घातक बैक्टीरिया पाए जाने की पुष्टि के बाद वह स्रोत भी बंद कर दिया गया है।
रविवार को 50 से अधिक नए मरीज सामने
रविवार को 50 से अधिक नए मरीज सामने आए, जबकि 20 मरीजों को गंभीर हालत में आईसीयू में भर्ती किया गया। टैंकरों के जरिए की जा रही जल आपूर्ति को भी पूरी तरह सुरक्षित नहीं माना जा रहा है, जिससे प्रशासन की तैयारियों और जल प्रबंधन व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए केंद्र और राज्य सरकार की विशेषज्ञ टीमें इंदौर पहुंच चुकी हैं। ये टीमें बीमारी के फैलाव के वास्तविक कारणों की जांच कर रही हैं। प्रभावित क्षेत्रों में पानी की आपूर्ति और स्वच्छता व्यवस्था पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है।
दूषित पानी के स्रोत की पहचान में जुटीं राष्ट्रीय टीमें
विशेषज्ञ डॉक्टरों के अनुसार, जब किसी क्षेत्र में बीमारी के मामले सामान्य से कहीं अधिक हो जाते हैं, तो उसे महामारी की श्रेणी में रखा जाता है। भागीरथपुरा की स्थिति भी इसी स्तर पर पहुंच चुकी है। राष्ट्रीय स्तर की टीमें यह पता लगाने में जुटी हैं कि दूषित पानी का स्रोत एक ही स्थान है या इसके कई बिंदु हैं। इस बीच बढ़ते जनाक्रोश और राजनीतिक दबाव के बीच कलेक्टर शिवम वर्मा ने रविवार सुबह स्मार्ट सिटी कार्यालय में एक उच्चस्तरीय बैठक की। बैठक में ICMR (कोलकाता), बैक्टीरियल संक्रमण विशेषज्ञ और भोपाल की स्टेट सर्विलांस टीम के कम्युनिटी मेडिसिन एक्सपर्ट्स शामिल हुए।
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