मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि इंडिया एआई मिशन भारत को राष्ट्रीय स्तर की एआई अवसंरचना विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ा रहा है। वैश्विक एआई रैंकिंग-2025 में भारत तीसरे स्थान पर है। एआई को देश की उत्पादकता बढ़ाने, आईटी प्रतिभा का उपयोग करने और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर को बेहतर बनाने के लिए अपनाया गया है। इसके प्रमुख पहलुओं में स्वदेशी डेटासेट्स, भारतीय भाषाओं पर आधारित फाउंडेशन मॉडल्स, सब्सिडी आधारित कंप्यूटर अवसंरचना और सुरक्षित एआई गवर्नेंस शामिल हैं।
स्टार्टअप्स और एआई नवाचार के लिए एआई कोश और जीपीयू अवसंरचना
‘एआई कोश’ प्लेटफॉर्म पर 6,250 से अधिक स्वदेशी डेटासेट्स उपलब्ध हैं। इसमें सैंडबॉक्स टूल्स और फ्री कंप्यूटर एक्सेस भी है। इसके अलावा, 38 हजार जीपीयू सब्सिडी दर पर उपयोग में लाए जा रहे हैं, जिससे एआई नवाचार को बढ़ावा मिला है। ‘इनोवेशन सेंटर’ के माध्यम से 12 स्टार्टअप्स को स्वदेशी एलएलएम और एसएलएम विकसित करने में मदद दी जा रही है।
स्वास्थ्य और नागरिक सेवाओं में एआई के उदाहरण
- केआरएआई डायग्नोस्टिक्स ने छाती के एक्स-रे से टीबी स्क्रीनिंग विकसित की, जो 105 से अधिक देशों में लागू और एफडीए स्वीकृत है।
- कंवर्ज इन (नोकोबा) सरकारी कॉल सेंटर्स और शिकायत निवारण में एआई एजेंट्स का उपयोग कर लागत घटा और नागरिक संतुष्टि बढ़ाई।
एआई प्रतिभा निर्माण और शिक्षा
‘एआई फॉर ऑल’ कार्यक्रम के तहत 570 एआई और डेटा लैब्स स्थापित की जा रही हैं। यूजी, पीजी और पीएचडी छात्रों को स्टाइपेंड, मेंटरशिप और कंप्यूटर एक्सेस दिया जा रहा है।
शासन में एआई और जीआईएस का एकीकरण
‘जिला जीआईएस प्लानिंग सिस्टम’ के माध्यम से योजनाओं की निगरानी और कार्यान्वयन में पारदर्शिता आई है। एआई, जीआईएस, ड्रोन और सैटेलाइट इमेजरी के संयोजन से शहरी नियोजन, जल प्रबंधन और खनन निगरानी में सुधार हुआ है।
आर्थिक और सामाजिक विकास में एआई
एआई उत्पादकता, रोजगार, नवाचार और समावेशी विकास को बढ़ावा दे रहा है। कृषि में एआई आधारित मृदा परीक्षण, स्वास्थ्य में एआई डायग्नोस्टिक्स, और एमएसएमई में डिजिटल अवसंरचना के माध्यम से यह तकनीक प्रभावी साबित हो रही है।
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